पटना HC ने कहा- वकालत करने का अधिकार, काम मिलने पर पेश होने का अधिकार है

पटना हाईकोर्ट ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसले में वकीलों और उनके मुवक्किलों के बीच पेशेवर रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है।

पटना : पटना हाईकोर्ट ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसले में वकीलों और उनके मुवक्किलों के बीच पेशेवर रिश्तों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था अपने वकील की पेशेवर सेवाएं समाप्त कर देती है या उसकी जगह किसी दूसरे अधिवक्ता को नियुक्त करती है, तो महज इस फैसले के आधार पर संबंधित वकील ग्राहक के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर नहीं कर सकता। अदालत के इस फैसले को कानूनी अधिकारों और पेशेवर आजादी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

SBI के अधिकारियों के खिलाफ दायर 25 लाख के मानहानि के मुकदमे को खारिज कर दिया - न्यायमूर्ति रमेश चंद्र मालवीय

न्यायमूर्ति रमेश चंद्र मालवीय ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने एक वकील द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों के खिलाफ दायर 25 लाख रुपए के मानहानि के मुकदमे को खारिज कर दिया। यह मुकदमा वकील को बैंक के पैनल से हटाए जाने के बाद दायर किया गया था। यह मामला भारतीय स्टेट बैंक और मंतोष प्रसाद से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील की सेवाएं जारी रखना या उन्हें समाप्त करना मुवक्किल का वैधानिक और व्यावसायिक अधिकार है।  

अदालत ने आगे कहा- कोई भी क्लाइंट बिना कोई कारण बताए अपना वकील बदल सकता है

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी वकील के वकालत करने के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि उसे किसी खास क्लाइंट द्वारा काम पर रखा ही जाए या बनाए रखा जाए। अदालत ने कहा, "वकालत करने का अधिकार, काम मिलने पर पेश होने का अधिकार है, यह ऐसा अधिकार नहीं है कि आपको काम पर रखा ही जाए। अदालत ने आगे कहा कि कोई भी क्लाइंट बिना कोई कारण बताए अपना वकील बदल सकता है।

पटना हाईकोर्ट ने कहा- किसी वकील को काम से हटाने के लिए क्लाइंट को कोई कारण बताने की जरूरत नहीं होती

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वकील को काम से हटाने के लिए क्लाइंट को कोई कारण बताने की जरूरत नहीं होती। अपनी इस आजादी का इस्तेमाल करना चाहे वह वकालतनामा वापस लेना हो, किसी नए वकील को काम पर रखना हो, या किसी वकील को पैनल से हटाना हो एक कानूनी अधिकार का इस्तेमाल है। इसे अपने आप में वकील पर कोई आरोप नहीं माना जा सकता।

ब्यूरो रिपोर्ट