पटना: राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों की समस्याओं के समाधान और पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने की मांग को लेकर गुरुवार को राजधानी में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। आंदोलन का नेतृत्व मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय एवं पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से बडी संख्या में पहुंचे प्रतिनिधियों ने दारोगा प्रसाद राय ट्रस्ट भवन से पंचायती राज मंत्री के आवास का घेराव करने के लिए मार्च किया, लेकिन पुलिस ने पुल के समीप रोक दिया। इस दौरान काफी देर तक जद्दोजहद हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी ने प्रतिनिधियों से वार्ता कर ज्ञापन प्राप्त किया। वार्ता में मिथिलेश कुमार राय, अमोद कुमार निराला, जयमाला कुमारी पासवान, अनुज कुमार सिंह, सुनील यादव एवं राजीव सिंह मंटू सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।
प्रतिनिधियों ने ग्राम सभा की स्वतंत्रता बहाल करने, ग्राम कचहरी को सर्वसुविधा संपन्न बनाने, छठे राज्य वित्त आयोग की राशि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद को जारी करने, सोलहवें वित्त आयोग की राशि के लिए केवल SBI में खाता खोलने का आदेश वापस लेकर अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का विकल्प देने तथा अनटाइड राशि पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की। इसके अतिरिक्त OSR नियमावली तत्काल लागू करने और मोबाइल टावरों को इसमें शामिल करने, BSPRI की कथित अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा पंचायती राज विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई। मुख्यमंत्री के सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों के समक्ष आ रही बाधाओं को दूर करने और पंचायतों के अधिकार सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया।
पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने ग्राम कचहरी से संबंधित समस्याओं को लेकर अलग से 11 सूत्री मांगपत्र सौंपा। इसमें ग्राम कचहरी को आवश्यक सुविधाएं एवं संसाधन उपलब्ध कराने, प्रहरी-सह-सफाई कर्मियों तथा अन्य प्रतिनिधि कर्मियों का भत्ता एवं मानदेय सुनिश्चित करने सहित ग्राम कचहरी के सुचारु संचालन और प्रतिनिधियों की समस्याओं के समाधान से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। संगठन ने दावा किया कि कार्यक्रम की सूचना के महज 48 घंटे के भीतर बड़ी संख्या में प्रतिनिधि पटना पहुंचे। संगठन के अनुसार, प्रदर्शन में 20 हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री सचिवालय में ज्ञापन सौंपने के बाद प्रतिनिधि शाम पांच बजे तक अपनी मांगों पर डटे रहे। सरकार की ओर से सकारात्मक पहल के आश्वासन के बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया।
मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय एवं पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने कहा कि सरकार को सात दिनों के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय लेकर कार्रवाई करनी होगी। केवल मौखिक आश्वासन से समस्याओं का समाधान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में मांगें पूरी नहीं हुईं तो करीब ढाई लाख त्रिस्तरीय पंचायत एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों को एकजुट कर व्यापक और निर्णायक आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पंचायती राज मंत्री के आवास का फिर से घेराव किया जाएगा।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि ग्राम सभा की स्वतंत्रता, पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा, ग्राम कचहरी को सशक्त बनाने और पंचायती राज संस्थाओं को वास्तविक अधिकार दिलाने के लिए है।