राज्य में वैसे युवा जो उच्च शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तलाश को लेकर के सरकार की तरफ नजरे लगाए हुए थे, उनके लिए एक हैरान करने वाली खबर आई है। दरअसल राज्य सरकार के द्वारा घोषित किए गए नव निर्मित डिग्री कॉलेज में संविदा प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर के बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह कि इस नोटिफिकेशन के अनुसार अब पदों की संख्या में कटौती कर दी गई है। यानि पहले जहां 3687 पदों पर बहाली की बात सामने आ रही थी, वहीं अब कटौती के बाद 2532 खाली पदों पर ही बहाली प्रक्रिया पूरी होगी। इस संबंध में बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने अपना नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट कर दिया है कि इन पदों पर जो बहाली की प्रक्रिया होगी, वह राज्य के वैसे नव स्थापित डिग्री कॉलेज के लिए होगी, जिनका उद्घाटन हाल ही में सीएम के द्वारा किया गया है। 3687 वैकेंसी जो पहले के लिए तय किए गए थे। वह इंग्लिश, हिंदी, इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, सोशियोलॉजी और पॉलिटिकल साइंस के लिए थे लेकिन अब नये नोटिफिकेशन के अनुसार 2532 पदों पर ही बहाली होगी। इनके लिए विषय हिंदी, इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, इंग्लिश और सोशियोलॉजी है। अहम यह कि इनमें प्रत्येक विषय के लिए 422 पदों पर नियुक्ति होगी यानि कुल 2532 पदों पर ही नियुक्ति की जाएगी।

यानी संशोधित और नए नियम के तहत इन सभी विश्वविद्यालय में चिन्हित छह अनिवार्य विषयों के लिए खाली पदों की संख्या एक समान है। पूर्व में घोषित सीट और अभी जारी नोटिफिकेशन के अनुसार सीटों की संख्या में कमी होने से अब प्रतियोगित कठिन हो सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि इसका सीधा असर नेट और पीएचडी क्लियर कर चुके युवाओं के रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा। हालांकि खबर यह भी आ रही है कि इस पूरी बहाली प्रक्रिया में एक कानूनी पेंच भी फंस गया है। अपनी सेवा की सुरक्षा को लेकर पूर्व से कार्यरत कुछ गेस्ट फैकल्टी ने पटना हाइकोर्ट में अपनी याचिका को दाखिल किया है। ऐसे हालात में अब सबकी निगाहें कोर्ट की तरफ है।