पेपर लीक और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ आइसा समेत विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र पटना की सड़कों पर निकले। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया। इस बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले भी दागे गए।
प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के गेट नंबर 10 के पास से मार्च निकालते हुए जेपी गोलंबर पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुलिस ने जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग कर छात्रों को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस ने छात्रों से वापस लौटने की अपील की गई, लेकिन प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले भी दागे गए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई। बताया जा रहा है कि झड़प में गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश कुमार मिश्रा घायल हो गए। छात्र पेपर लीक मामलों की फास्ट ट्रैक जांच, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर रोक और शिक्षा के निजीकरण के विरोध समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि पटना में आयोजित यह मार्च दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में निकाला गया है।
बता दें कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के समर्थन और पुलिस कार्रवाई के विरोध में यह मार्च निकाला गया। पेपर लीक, शिक्षा में भ्रष्टाचार और निजीकरण के खिलाफ छात्रों ने आवाज उठाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग की। 7.5 CGPA की अनिवार्यता खत्म कर समान डिग्री देने की मांग। यूजी, पीजी और पीएचडी की फीस वृद्धि वापस लेने की मांग। सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी शोधार्थियों के लिए नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने की मांग। पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग। विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, शोधार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि इस मार्च में शामिल हुए।