कदाचार से संबंधित मामले में कोई प्राधिकार अपने अधीनस्थ प्राधिकार को अनुशासनिक कार्रवाई की शक्ति प्रदान करता है तो उस अधीनस्थ प्राधिकार को सरकारी सेवक को वृहद दंड देने का अधिकार नहीं होगा। साथ ही ऐसे मामलों में अगर सरकारी सेवक अपने बचाव संबंधी अवसर देने वाली नोटिस का जवाब नहीं देता है और इसका प्रकाशन किसी समाचार पत्र में किया जाता है तो इस प्रकाशन के एक महीने के बाद नोटिस कानूनी रूप से तामील मानी जाएगी।
यह जानकारी बुधवार को सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय की ओर से प्रखंड कृषि और दूसरे पदाधिकारियों के लिए आयोजित उन्मुखीकरण कार्यशाला में दी गई। कार्यशाला का आयोजन दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में उपरोक्त कृषि पदाधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील (सीसीए) नियमावली 2005 के प्रावधानों से रूबरू कराने की दिशा में किया गया।
इस अवसर पर प्रशिक्षण पदाधिकारी सतीश तिवारी ने क्रिमिनल केस में होने वाले आपराधिक जांच और अनुशासनिक कार्रवाई की दिशा में प्रशासनिक जांच की प्रक्रियाओं को बारीकी से समझाया। एक ही घटनाक्रम से उत्पन्न आपराधिक और अनुशासनिक कार्रवाई साथ-साथ चल सकती है। यह एक दूसरे के निर्णय को किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं करेंगे। कार्यक्रम में बतौर प्रशिक्षक भगवान दास साहू और शालिग्राम पांडेय ने सरकारी सेवक के कदाचार के मामले में गठित किए जाने वाले आरोप पत्र और उसकी सावधानियों की जानकारी दी।
बता दें कि इस प्रशिक्षण सत्र में हाल ही में नई दिल्ली स्थित सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संस्थान (आईएसटीएम) में प्रशिक्षित हुए मास्टर ट्रेनर्स से सात पदाधिकारी मौजूद रहे। यह मास्टर ट्रेनर्स तीन दिन तक प्रशिक्षण की बारीकियों से रूबरू होंगे और फिर खुद एक प्रशिक्षक के तौर पर प्रशासनिक पदाधिकारी और कर्मचारियों को बैचवार ट्रेनिंग देंगे। कार्यशाला में निदेशालय के संयुक्त सचिव प्रभात कुमार, उप सचिव आलोक कुमार आदि की प्रमुख उपस्थिति रही।