तिब्बत में बादल फटने से हुई तबाही, जल संसाधन विभाग अलर्ट, वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी गेट खोले गए

नेपाल से होकर आने वाले पानी का सैलाब से गंडक नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने की संभावना है। इसको देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अलर्ट घोषित कर दिया है।

तिब्बत प्रभाग में बुधवार की सुबह बादल के फटने के कारण नेपाल के भोटे-कोशी नदी, जो तिब्बत में उद्‌गमित होकर नेपाल स्थित त्रिशूली नदी में मिल जाती है, में लगभग तीन मीटर का सैलाब प्रवाहित हो रहा है। नेपाल से होकर आने वाले पानी का सैलाब से गंडक नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने की संभावना है। इसको देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अलर्ट घोषित कर दिया है।

विदित हो कि तिब्बत प्रभाग में बुधवार की सुबह बादल फटने के कारण नेपाल में पानी का सैलाब आने से भारी क्षति हुई है। नेपाल में तबाही मचाने के बाद उस पानी के गंडक नदी में आने की संभावना है।  जल संसाधन विभाग द्वारा इस घटना पर त्वरित सतर्कता बरतते हुए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी गेटों (36 गेट) को खोला गया है और गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को भेजा गया है। साथ ही गंडक नदी बेसिन में अवस्थित सभी जिलों में चेतावनी संवाद जारी कर दिया गया है।

इस संबंध में विभागीय पदाधिकारियों को संभावित आकस्मिक स्थिति के मद्देनजर सभी आवश्यक तैयारियों सुनिश्चित करते हुए लगातार चौकसी एवं निगरानी बरतने हेतु निदेशित किया गया है। इस क्रम में बाढ की स्थिति से निपटने हेतु सामग्रियों के भंडारण एव तटबंधों के सतत् निरीक्षण का पुख्ता इंतजाम किया गया है।

बताया जाता है कि इस घटना के फलस्वरूप इसके निम्नप्रवाह में गंडक नदी के जलस्त्राव एवं जलस्तर में भी अप्रत्याशित वृद्धि सभावित है। बुधवार को मध्यान 12 बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 86,000 क्यूसेक का जल स्त्राव प्रवाहित हुआ है, जिसकी प्रवृत्ति बढ़ने की है। नेपाल प्रभाग स्थित नारायणी नदी का देवघाट गेज स्थल पर वर्तमान जलस्तर 4.77 मीटर है। इस स्थल पर खतरे का निशान नौ मीटर एवं चेतावनी स्तर 7.30 मीटर है। यहां नदी में पानी बढ़ने पर गंडक बराज तक पहुँचने में लगभग 3.50 घंटा समय लगने की संभावना है।

इसको लेकर मुख्य सचिव के स्तर से संबंधित सभी जिला पदाधिकारी के साथ अकस्मात बैठक आहूत कर मामले से अवगत कराते हुए सभी आवश्यक तैयारियां यथा तटबंध के अंदर के आवासितों को माईकिंग कराकर अवगत कराना तथा ससमय सुरक्षित स्थान पर ले जाने हेतु आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने हेतु निदेशित किया गया। वहीं संभावित प्रवाहित क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को नियुक्त किया जा रहा है।

उधर, गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा मुख्य सचिव, बिहार, प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग एवं सचिव, जल संसाधन विभाग के साथ बैठक आहूत कर स्थिति की समीक्षा की गयी एवं संबंधितों को 'हाई अलर्ट' मोड में रहते हुए सभी आवश्यक कार्रवाई ससमय सुनिश्चित करने तथा स्थिति पर लगातार नजर बनाये रखने हेतु निर्देश दिया गया है।