अभाविप ने किया ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र बचाओ’ छात्र गर्जना मार्च

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 'अराजकता रोको, लोकतंत्र बचाओ' आह्वान पर शुक्रवार को राजधानी में विशाल छात्र गर्जना मार्च का आयोजन किया गया।

पटना: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 'अराजकता रोको, लोकतंत्र बचाओ' आह्वान पर शुक्रवार को राजधानी में विशाल छात्र गर्जना मार्च का आयोजन किया गया। कारगिल चौक पर आयोजित इस जनसभा में हजारों विद्यार्थियों एवं अभाविप कार्यकर्ताओं ने सहभागिता कर लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों के विरुद्ध एकजुटता का संदेश दिया। भारी बारिश के बावजूद उत्तर बिहार एवं दक्षिण बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए। जनसभा के पश्चात कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बैरिकेडिंग पार करते हुए डाक बंगला चौराहा तक मार्च निकाला, जहाँ रैली का समापन हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डाबस, केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य समीक्षा यादववंशी, दक्षिण बिहार प्रांत मंत्री सुमित कुमार सिंह तथा उत्तर बिहार प्रांत मंत्री पुरुषोत्तम कुमार की उपस्थिति रही।

मार्च में शामिल वक्ताओं ने कहा कि भारत लोकतंत्र है, भीड़तंत्र नहीं। सरकारें जनता के मतों से बनती और बदलती हैं, सड़क पर शक्ति प्रदर्शन से नहीं। बांग्लादेश और नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की अराजक राजनीति स्वीकार्य नहीं है। बाहरी ताकतों और डीप स्टेट की भूमिका से जुड़े सवालों के बीच यह स्पष्ट है कि भारत की राजनीतिक दिशा का निर्धारण भारतीय नागरिक ही करेंगे। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसमें गड़बड़ी के आरोप प्रमाणों के साथ संवैधानिक मंचों पर उठाए जाने चाहिए। केरल, पंजाब और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों में SIR को लेकर राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख उनके दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े करते हैं। संस्थाओं पर दबाव बनाने और राजनीतिक प्रदर्शनों से विद्यार्थियों, व्यापारियों तथा आम नागरिकों के दैनिक जीवन में व्यवधान उत्पन्न करना अनुचित है।

अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास, मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर आधारित है। देश में सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल जनता के पास है, जो अपने मताधिकार के माध्यम से सरकारों को चुनती और बदलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति का स्वागत है, लेकिन भीड़ के दबाव, अराजकता और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर सत्ता परिवर्तन का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता है, तो उसके लिए प्रमाण प्रस्तुत करते हुए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर राजनीतिक स्वार्थों के लिए सवाल उठाना तथा उन्हें दबाव में लाने का प्रयास लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों से प्रेरित होकर भारत में भी अराजकता के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की कल्पना करने वालों को समझना चाहिए कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और यहां सरकारों का भविष्य जनता तय करती है। दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, केरल और ओडिशा के छात्रसंघ चुनावों में अभाविप को मिली सफलता इस बात का प्रमाण है कि विद्यार्थी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं और राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ खड़े हैं। पटना में आयोजित छात्र गर्जना मार्च में विद्यार्थियों की व्यापक सहभागिता लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अभाविप देश के युवाओं से आह्वान करती है कि वे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित की रक्षा के लिए सजग रहें तथा अराजकता और भीड़तंत्र की राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करें।"

वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डाबस ने कहा कि भारत की युवा शक्ति की जड़ें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सभ्यतागत चेतना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध में हैं। बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों को भारत की परिस्थितियों पर लागू करने का प्रयास भारतीय समाज की विशिष्टता और सांस्कृतिक चेतना को नजरअंदाज करना है। भारत का युवा अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करता है और देश की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक, रचनात्मक एवं लोकतांत्रिक मार्ग में विश्वास रखता है। पटना में छात्र गर्जना मार्च के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह स्पष्ट किया है कि भारतीय युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और देश की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने में लगेगी। अभाविप का मानना है कि युवाओं की भूमिका केवल परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं, बल्कि अपने विचार, आचरण और सक्रिय सहभागिता से राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने में भी है।