अभिषेक बंटी' का शक्ति प्रदर्शन, वहीं से सियासी सफर का आगाज, जहां बदली थी नितिन नवीन की किस्मत

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Sujeet Kumar
Updated at : Jul 08, 2026, 2:23:00 PM

बिहार में बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर हलचल तेज है। बीजेपी के उम्मीदवार अभिषेक कुमार 9 जुलाई 2026 को नामांकन दर्ज करेंगे। खास बात ये है कि बीजेपी के सभी कार्यकर्ता और नेता बिहार स्कॉउट एंड गाइड ऑफिस में एक जुट होंगे। ये वही जगह है, जहां से बांकीपुर के पूर्व विधायक नितिन नवीन पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए नयी दिल्ली से कॉल आयी थी। यही से अभिषेक बंटी अपने सियासी सफर का आगाज करेंगे और पटना समाहरणालय जायेंगे और नामांकन दर्ज करेंगे। जबकि जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर 13 जुलाई 2026 की सुबह 10 बजे बांकीपुर विधानसभा सीट उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उनके नामांकन को लेकर जन सुराज ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है और बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। 

बता दें कि गत 14 दिसंबर 2025 को भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा नितिन नबीन को पार्टी का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला लिया गया था। जिसकी सूचना उन्हें एक महत्वपूर्ण फोन कॉल के जरिए दी गई। इस ऐतिहासिक फैसले के तुरंत बाद उन्होंने 15 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना कार्यभार संभाला था। इसके बाद, मकर संक्रांति के बाद शुरू हुई संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के तहत वे निर्विरोध चुने गए और 20 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा के 16वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कमान संभाल ली। मात्र 45 वर्ष की आयु में इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले नितिन नबीन भाजपा के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। इसके बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हुई है। 

अगर बांकीपुर के इतिहास की बात करें तो बांकीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भाजपा के पक्ष में रहा है। वर्ष 1995 से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने अपने व्यापक पहचान बनायी थी और कई बार उन्होंने जीत दर्ज की थी। पिछले तीन दशकों में भाजपा लगातार इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही है। ऐसे में प्रशांत किशोर के सामने न केवल अपना राजनीतिक प्रभाव साबित करने की चुनौती होगी, बल्कि भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे विजय अभियान को रोकने की भी बड़ी परीक्षा होगी।

पटना से आभा की रिपोर्ट