मुजफ्फरपुर: जिले में जमीन के कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 70 डिसमिल खातियानी और पुश्तैनी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज कराने के मामले में मुशहरी अंचल के सीओ महेंद्र शुक्ला और राजस्व अधिकारी तरुण तरन को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच में कुछ अन्य राजस्व कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
पूरा मामला अहियापुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। इस संबंध में 29 अगस्त 2026 को अहियापुर थाने में कांड संख्या 1375/26 दर्ज किया गया था। मामले के वादी विजय कुमार हैं। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर प्रभारी एसडीपीओ टाउन-2 हिमांशु कुमार के नेतृत्व में अहियापुर थाना पुलिस की विशेष टीम गठित की गई थी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि वैशाली जिले के सदर थाना क्षेत्र के रहने वाले कृष्णनंदन पासवान ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के आधार पर 70 डिसमिल खातियानी और पुश्तैनी जमीन का फर्जी केवाला कराकर अपने नाम दाखिल-खारिज करा लिया था। इसके बाद उक्त जमीन की रजिस्ट्री सोनू कुमार उर्फ अभिनव, अरविंद कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम पर कराई गई और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। जांच के दौरान मुशहरी अंचल में पदस्थापित सीओ महेंद्र शुक्ला, कर्मचारी अनुज कुमार और राजस्व कर्मचारी तरुण तरन की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय से वारंट प्राप्त किया और वारंट के आधार पर सीओ महेंद्र शुक्ला तथा राजस्व अधिकारी तरुण तरन को गिरफ्तार कर लिया।
प्रभारी एसडीपीओ टाउन-2 हिमांशु कुमार ने बताया कि मामले में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है, ताकि जमीन के कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का भी खुलासा किया जा सके। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच में जुटी है। इस कार्रवाई के बाद जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुजफ्फरपुर से मुकेश चौरसिया की रिपोर्ट