बिहार के लखीसराय का प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर सोमवार की सुबह हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज रहा था, लेकिन कुछ ही देर में यहां कभी ना याद करने वाली घटना का गवाह बन गया। अशोक धाम मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान अचानक मची भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हादसे के बाद अशोक धाम मंदिर एक बार फिर से चर्चा में है। अशोक धाम मंदिर इससे पहले, साल 2023 में चर्चा में आया था, जब गृहमंत्री अमित शाह ने यहां शिव पूजा की थी। इस मंदिर को बिहार का देवघर भी कहा जाता है। आइये जानते जानते हैं क्या है लखीसराय का प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर की कहानी।
लखीसराय का प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर, बिहार ही नहीं, कई राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। अशोकधाम आज बिहार के प्रमुख शिव तीर्थों में गिना जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के मौके पर यहां बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक से श्रद्धालु पहुंचते हैं। अशोक धाम मंदिर-लखीसराय जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर रजौना चौकी इलाके में स्थित है। विशाल शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कांवरियों की लंबी कतारें लगती हैं। सावन के सोमवार को स्थिति ऐसी हो जाती है कि मंदिर परिसर और आसपास का इलाका श्रद्धालुओं से पट जाता है। अशोक धाम मंदिर को ‘बिहार का देवघर’ भी कहा जाता है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचते हैं।
कहा जाता है कि अशोकधाम की कहानी भी अपने आप में बेहद दिलचस्प है। मान्यता और उपलब्ध स्थानीय विवरणों के अनुसार, 7 अप्रैल 1977 को रजौना चौकी गांव में दो बालक अशोक यादव और गजानन साव यहां रोज की तरह गायें चरा रहा था। गिल्ली-डंडा खेलते समय जब उसकी गिल्ली झाड़ियों में गई, तो गिल्ली की तलाश करते हुए उसने ज़मीन के नीचे दबा हुआ काले चमकदार पत्थर का एक बड़ा हिस्सा दिखाई दिया।
जब वहां खुदाई की गई तो जमीन के भीतर से विशालकाय काले प्रस्तर का शिवलिंग मिला। इस खोज के बाद धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता चला गया। स्थानीय विद्वान पंडित कामेश्वर पांडेय के सुझाव पर चरवाहे अशोक के नाम को जोड़ते हुए मंदिर का नाम श्री इंद्रदमेश्वर महादेव अशोकधाम रखा गया।
आज अशोकधाम परिसर में मुख्य शिवलिंग के अलावा माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी मौजूद हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ यहां सामाजिक गतिविधियां भी होती हैं। ट्रस्ट की ओर से निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। अशोकधाम की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। इसकी धार्मिक और पर्यटन क्षमता को देखते हुए बिहार सरकार ने वर्ष 2024 में अशोकधाम महोत्सव को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया। इसके बाद मंदिर परिसर को और विकसित करने की योजनाओं पर काम तेज हुआ। मंदिर के पास करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक शिवगंगा विकसित करने की योजना भी इसी कड़ी का हिस्सा है। इसे तिरुपति बालाजी मंदिर के पुष्करिणी तालाब की तर्ज पर विकसित किए जाने की बात कही गई है।
बता दें कि अशोक धाम मंदिर में एक अफवाह ने पूरा माहौल बदल दिया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने और बैरिकेडिंग टूटने के बाद अचानक भगदड़ की स्थिति पैदा हुई। देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई और कई श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि बैरिकेडिंग टूटने से पहले वहां का बिजली का खंभा गिरा, जिससे भगदड़ के हालात बने। इस हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। डीएम शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, अचानक दो ट्रेनें एक साथ खड़ी होने से मंदिर में भीड़ अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। इसी दौरान बाईं तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई, जिसमें कई महिलाएं गिर गईं।