जमुई : मानसून की अभी शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन हल्की बारिश में ही जिला मुख्यालय की सड़कें और सदर अस्पताल परिसर तालाब में तब्दील हो गए। जगह-जगह जलजमाव से आमजन का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
शनिवार-रविवार की हल्की बारिश के बाद शहर के निचले इलाकों, गलियों और मुख्य सड़कों पर पानी भर गया। चार पहिया, टोटो, मोटरसाइकिल सहित अन्य वाहन पानी में तैरते नजर आए। नालियों का गंदा पानी घरों में घुसने लगा।
सदर अस्पताल की बदहाली
सबसे बुरी स्थिति सदर अस्पताल परिसर की रही। हल्की बारिश के बाद ही अस्पताल परिसर में घुटने भर पानी जमा हो गया। मरीज, तीमारदार और वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों ने कहा कि जलजमाव के कारण मच्छर और कीड़े-मकोड़े बढ़ेंगे, जिससे इलाज करा रहे मरीजों के दोबारा बीमार होने का खतरा है।
नाले-नालियों की गुणवत्ता पर सवाल
लोगों का आरोप है कि नाले-नालियों का निर्माण सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया गया है। डेढ़ से 2 फीट की पतली नालियां बनाकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। यही वजह है कि थोड़ी बारिश में ही पूरा शहर डूब जाता है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि चुनाव के समय मंत्री, विधायक बड़ी-बड़ी योजनाओं और दावों की बात करते हैं, लेकिन चुनाव बाद सब भूल जाते हैं। बिहार सरकार की एसपी योजना का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा।
लोगों ने नगर परिषद के अधिकारियों और अध्यक्ष से सवाल किया कि आखिर जलनिकासी की व्यवस्था कब दुरुस्त होगी।
पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात से पहले नालों की सफाई, नालियों के जीर्णोद्धार और सदर अस्पताल परिसर से जलजमाव हटाने की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि आमलोगों को राहत मिल सके।
जमुई से हेमंत सक्सेना की रिपोर्ट