विजयीपुर/गोपालगंज। गोपालगंज के विजयीपुर प्रखंड में प्रमुख की कुर्सी को लेकर जारी सियासी घमासान एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 6 नवंबर 2026 को होने वाला प्रखंड प्रमुख का निर्वाचन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। माननीय उच्च न्यायालय एवं पंचायती राज विभाग से संबंधित आदेशों की समीक्षा के बाद राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने यह निर्णय लिया है। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने और सभी संबंधित पक्षों को सूचित करने का निर्देश दिया गया है।
निर्वाचन रद्द होने की खबर सामने आते ही विजयीपुर की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। करीब एक वर्ष से अधिक समय से प्रमुख पद को लेकर जारी खींचतान के बीच एक बार फिर चुनाव की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विवाद सुलझने से पहले ही पंचायत चुनाव की बारी आ जाएगी और विजयीपुर को नया प्रखंड प्रमुख मिल जाएगा?
सालों से कुर्सी की लड़ाई, हर बार नया मोड़!
विजयीपुर प्रखंड प्रमुख का पद लंबे समय से राजनीतिक खींचतान और विवादों के केंद्र में बना हुआ है। करीब एक वर्ष पहले प्रखंड विकास पदाधिकारी के कार्यालय में शक्ति परीक्षण भी हुआ था, लेकिन यह प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई। इसके बाद से ही प्रमुख पद के चुनाव को लेकर लगातार तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं।
इस सियासी मुकाबले में एक ओर वर्तमान प्रमुख चंदा सिंह और उनके पति विजय सिंह का पक्ष चर्चा में रहा,जो गोपालगंज जिला परिषद का अध्यक्ष भी रह चुकी है,तो दूसरी ओर जगदीशपुर के पूर्व मुखिया संजय साहू अपने समर्थित उम्मीदवार के साथ दावेदारी की लड़ाई में सक्रिय बताए जाते रहे। पंचायत समिति सदस्यों के समर्थन को लेकर राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिशों के बीच यह विवाद लगातार लंबा खिंचता चला गया।
6 नवंबर के चुनाव पर भी फिरा पानी
जब 6 नवंबर 2026 को निर्वाचन की तारीख निर्धारित हुई, तो एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं। संभावित चुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं और दावेदारों की उम्मीदें भी बढ़ गई थीं। लेकिन न्यायालय और पंचायती राज विभाग से संबंधित आदेशों की समीक्षा के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्धारित निर्वाचन रद्द कर दिया।
इस फैसले के बाद प्रमुख पद की कुर्सी पर बना सस्पेंस और गहरा गया है। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि आखिर इस विवाद का समाधान कब निकलेगा और निर्वाचन की अगली तारीख कब तय होगी।
कहीं फैसला आने से पहले ही न आ जाए पंचायत चुनाव का दौर!
विजयीपुर की राजनीति में अब सबसे दिलचस्प सवाल यही है कि जब तक प्रखंड प्रमुख पद के विवाद पर कोई अंतिम फैसला आएगा, तब तक कहीं पंचायत चुनाव का दौर ही न आ जाए! यदि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में इसी तरह देरी होती रही, तो मौजूदा विवाद के समाधान से पहले ही अगले पंचायत चुनाव की परिस्थितियां बन सकती हैं।
हालांकि, पंचायत चुनाव कब होंगे और प्रखंड प्रमुख के निर्वाचन की आगे क्या प्रक्रिया होगी, यह संबंधित आधिकारिक कार्यक्रम और आदेशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना तय है कि 6 नवंबर को निर्धारित चुनाव नहीं होगा और विजयीपुर को नए प्रखंड प्रमुख के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
सालों की सियासी खींचतान, शक्ति परीक्षण पर विवाद और अब निर्वाचन रद्द होने का फैसला—विजयीपुर की प्रमुख वाली कुर्सी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अब देखना होगा कि कानूनी प्रक्रिया पहले अपना परिणाम देती है या पंचायत चुनाव का नया दौर इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को एक नई दिशा दे देता है।
विजयीपुर में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—प्रमुख की कुर्सी पर फैसला कब होगा?
विजयीपुर/गोपालगंज से शंकर जी की रिपोर्ट