विजयीपुर (गोपालगंज)। विजयीपुर प्रखंड को जिला मुख्यालय गोपालगंज से जोड़ने वाले खनुआ नदी पर स्थित माड़र पुल की स्थिति धीरे-धीरे चिंताजनक होती जा रही है। क्षेत्र की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस महत्वपूर्ण पुल की ऊपरी सतह से लेकर निचले हिस्से तक कई जगहों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। पुल की रेलिंग फट कर जंग लगी छड़ दिख रहा है और कई स्थानों पर रेलिंग के हिस्से क्षतिग्रस्त होते नजर आ रहे हैं। पुल की मौजूदा स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों में कभी भी किसी बड़े हादसे की आशंका को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और स्थिति के अनुसार पुल की ऊपरी सतह पर जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं। वहीं, पुल के निचले हिस्से में भी कंक्रीट टूटकर नीचे गिर चुका है। कुछ स्थानों पर सरिया और कंक्रीट की स्थिति खराब होने के संकेत मिल रहे हैं। जंग लगी छड़ दिख रहा है पुल की मजबूती को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते इसकी तकनीकी जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
माड़र पुल विजयीपुर और गोपालगंज के बीच आवागमन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों के साथ लोडेड ट्रक और अन्य भारी वाहन गुजरते हैं। विजयीपुर के अलावा आसपास के कई गांवों के लोगों की निर्भरता भी इसी सड़क और पुल पर है। ऐसे में पुल की खराब होती स्थिति केवल एक निर्माण संरचना की समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और आवागमन से जुड़ा गंभीर मामला है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुल की ऊपरी सतह पर मिट्टी और कूड़ा-कचरा जमा है। इससे पानी की निकासी के लिए बने छेद और पुल के जॉइंट भी प्रभावित होते नजर आ रहे हैं। पानी की उचित निकासी नहीं होने से पुल के हिस्सों में नमी और जलजमाव की समस्या बढ़ सकती है, जिससे पहले से क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थिति और खराब होने की आशंका है।
पुल पर लगे शिलापट्ट के अनुसार इसका निर्माण पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत कराया गया था। इसका उद्घाटन 10 जून 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। लगभग 15 वर्ष बाद पुल की मौजूदा स्थिति रखरखाव और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी पुल का निर्माण और उद्घाटन कर देना ही विभाग की जिम्मेदारी का अंत नहीं होता। बल्कि उसकी नियमित निगरानी, साफ-सफाई, तकनीकी जांच और समय-समय पर मरम्मत भी उतनी ही जरूरी है। आखिर जिस पुल पर प्रतिदिन हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करते हैं, उसकी सुरक्षा को लेकर विभाग कितनी गंभीरता से काम कर रहा है?
सड़क पर एंबुलेंस दिखती है, लेकिन पुल की बदहाली पर कब होगी कार्रवाई?
विडंबना यह भी है कि पथ निर्माण विभाग की एक रोड एंबुलेंस इस मार्ग पर अक्सर लावारिस स्थिति में खड़ी या घूमती नजर आती है। लेकिन स्थानीय लोगों के मन में सवाल है कि आखिर इस एंबुलेंस की वास्तविक उपयोगिता क्या है और पुल की देखरेख तथा सड़क सुरक्षा के लिए इसका क्या योगदान है? यदि विभाग के पास संसाधन उपलब्ध हैं तो उनका उपयोग पुल की नियमित निगरानी, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में क्यों नहीं किया जा रहा?
विभाग से तकनीकी जांच और अविलंब मरम्मत की मांग
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? पुल पर दिखाई दे रही दरारों और क्षतिग्रस्त हिस्सों को देखते हुए तत्काल विशेषज्ञों की टीम से तकनीकी जांच कराना जरूरी है। साथ ही पुल की रेलिंग की मरम्मत, ऊपरी सतह की सफाई, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और कमजोर हिस्सों की आवश्यक मरम्मत कराने की जरूरत है।
यदि समय रहते इस दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो भविष्य में इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पुल की वास्तविक संरचनात्मक मजबूती का आकलन तकनीकी जांच के बाद ही संभव है, लेकिन तस्वीरों में दिखाई दे रही स्थिति को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा।
सवाल साफ है-क्या विभाग पुल की सुरक्षा को लेकर समय रहते जागेगा या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी?
विजयीपुर (गोपालगंज) से शंकर जी की रिपोर्ट