गोपालगंज। विजयीपुर प्रखंड के सेंट जोसेफ स्कूल को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। छात्र के शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न, कथित अवैध वसूली, धमकी देने और विद्यालय की मान्यता से जुड़े आरोपों पर शिक्षा विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नई दिल्ली से जुड़े मामले के आलोक में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, विजयीपुर को पत्र जारी कर एक सप्ताह के भीतर बिंदुवार जांच प्रतिवेदन मांगा है।
भीषण गर्मी में खड़ा रखने और जुर्माना वसूलने का आरोप
विभागीय पत्र के अनुसार, विजयीपुर के बाजुडीह महुअवां निवासी रमेश दूबे ने परिवाद संख्या 102490 के तहत शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय के शिक्षक ने 17 और 18 अगस्त 2026 को एक छात्र को भीषण गर्मी में कक्षा के बाहर खड़ा रखा। इसके बाद छात्र से 100 रुपये जुर्माना वसूलने और उसकी अपार आईडी (APAAR ID) खराब करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने विद्यालय प्रबंधन पर घटिया गुणवत्ता की यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बनाने तथा अभिभावकों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा, विद्यालय में दसवीं कक्षा तक पढ़ाई संचालित किए जाने के बावजूद मान्यता की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। जब इस विषय पर शिकायत कर्ता रमेश दुबे से संपर्क किया गया तो उन्होंने घटीत घटना की आपबिती बताई
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मामले में कार्रवाई
पत्रांक BEP/Pvt. Sch/1368, दिनांक 10 अक्टूबर 2026 के तहत जारी निर्देश में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नई दिल्ली के रजिस्ट्रार के पत्र तथा मिसिल संख्या DD46499, दिनांक 21 सितंबर 2026 का हवाला दिया गया है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे मामले की जांच कर अपना स्पष्ट मंतव्य देते हुए एक सप्ताह के भीतर बिंदुवार रिपोर्ट उपलब्ध कराएं, ताकि इसे समय पर आयोग को भेजा जा सके।
इस विषय पर जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से टेलीफोनिक संपर्क किया गया तो पत्रकार का फोन रिसीव नहीं किया गया, इसके बाद उनके कार्यालय पहुंच कर मिलने का प्रयास किया गया दो बार लेकिन वह कार्यालय परिसर में मौजूद नहीं रहे, कार्यलय परिसर में मौजूद अन्य कर्मी से पता चला कि विद्यालय निरीक्षण में निकले हुए है , लेकिन पुनः 4 बजे मिलने का प्रयास किया गया लेकिन कार्यालय कक्ष बंद मिला
विद्यालय की मान्यता और बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विद्यालय की मान्यता को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि शिक्षा विभाग के आधिकारिक अभिलेखों और जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय स्तर पर विद्यालय के भवन, बच्चों के लिए उपलब्ध जगह और स्कूली वाहनों के सड़क पर खड़े होने से यातायात प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर प्रखंड शिक्षा कार्यालय को मौखिक रूप से अवगत कराया गया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सनद रहे कि यह क्षेत्र पूर्व शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का गृह प्रखंड है वर्तमान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जी गृह जिले से इस तरह की निजी विद्यालयों की शिक्षा के नाम पर व्यापार उद्योग चलाने पर शिक्षा विभाग पर प्रश्न चिन्ह उत्पन्न हो रहा है, जब की जबकि वर्तमान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पदभार ग्रहण करते ही प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्त चेतावनी दी गई थी ,और गैर निबंधन के विद्यालयो को बंद करने की बात कही गई थी! लेकिन आज तक विभाग के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया गया!
शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि उन्हें भय और दबाव में रखना। ऐसे में इस मामले ने विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था और शिक्षा विभाग की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विद्यालय की मान्यता, कथित उत्पीड़न तथा अन्य शिकायतों पर विभाग क्या कार्रवाई करता है।
गोपालगंज/विजयीपुर से शंकर जी की रिपोर्ट