विजयीपुर (गोपालगंज)। विजयीपुर प्रखंड में यूरिया, डीएपी और पोटाश खाद की कथित कालाबाजारी को लेकर किसानों की परेशानी अब राजनीतिक आंदोलन का रूप लेने लगी है। खाद की बढ़ती कीमतों और निर्धारित सरकारी दर से अधिक वसूली के खिलाफ महागठबंधन के नेताओं ने शुक्रवार को विजयीपुर के अंचलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रखंड के विभिन्न खाद दुकानदारों द्वारा सरकारी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरकों की बिक्री की जा रही है। इससे क्षेत्र के किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेताओं ने प्रशासन से खाद दुकानों की जांच कराने और किसानों को निर्धारित सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
महागठबंधन के नेताओं के अनुसार, बाजार में पोटाश की एक बोरी 2,200 से 2,500 रुपये, डीएपी 1,800 से 2,000 रुपये तक बेचे जाने का आरोप है। वहीं, धान के सीजन में यूरिया की कीमत भी 450 रुपये प्रति बोरी तक पहुंचने की बात कही गई है। किसानों का कहना है कि पहले ही मौसम की मार और फसल की बर्बादी से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है, ऐसे में खाद की महंगी कीमतों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 9 नवंबर तक प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई और किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो महागठबंधन की ओर से 9 नवंबर को धरना-प्रदर्शन के साथ चक्का जाम किया जाएगा।
इस दौरान पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष अमरेश यादव, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष प्रणेश्वर कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी, गामा यादव, राजद प्रखंड अध्यक्ष धर्मेंद्र माझी, सुरेंद्र मिश्र, माधव नाथ तिवारी सहित महागठबंधन के कई नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब सवाल यह है कि अन्नदाताओं की इस परेशानी पर कृषि विभाग और जिला प्रशासन कब संज्ञान लेगा? किसानों को समय पर और उचित कीमत पर खाद नहीं मिली तो खेती की लागत बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक मुश्किलें भी गहरा सकती हैं।
नोट: खाद की कीमतों और कालाबाजारी से जुड़े आरोप ज्ञापन सौंपने वाले नेताओं के दावे पर आधारित हैं। इनकी प्रशासनिक जांच आवश्यक है।
विजयीपुर (गोपालगंज) से शंकर जी की रिपोर्ट