कानून के रखवाले ही बदहाली के साए में, बारिश में टपकती छत के नीचे रात बिताने को मजबूर थाने के पुलिसकर्मी

जो पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद रहते हैं, आज वही अपनी बुनियादी सुविधाओं और एक मजबूत छत के लिए तरस रहे हैं। गोपालगंज जिले का विजयीपुर थाना वर्षों बीत जाने के बाद भी अपनी बदहाली पर आज भी आंसू बहा रहा है

गोपालगंज। जो पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद रहते हैं, आज वही अपनी बुनियादी सुविधाओं और एक मजबूत छत के लिए तरस रहे हैं। गोपालगंज जिले का विजयीपुर थाना वर्षों बीत जाने के बाद भी अपनी बदहाली पर आज भी आंसू बहा रहा है।

केन यूनियन के जर्जर भवन के भरोसे थाना

विजयीपुर थाने का अपना कोई भवन नहीं है। यह आज भी गन्ना उद्योग विभाग से जुड़े केन यूनियन (परसौनी समिति) के पुराने और अत्यंत जर्जर मकान में संचालित हो रहा है। कभी इस भवन में गन्ना उद्योग विभाग के लोग और भटनी मिल के केन मैनेजर रहा करते थे। उत्तर प्रदेश का भटनी मिल, जहां बिहार के स्थानीय किसान अपना गन्ना भेजा करते थे, उसी मिल कै द्वारा परसौनी समिति का गठन किया गया था। समिति के एक कर्मचारी (श्रीवास्तव जी) के निधन के बाद एक कमरे में आज भी ताला लगा है,यह भवन का अधिकांश हिस्सा पुलिस थाने को आवंटित हैं 

बारिश में खड़े होकर कटती हैं रातें, और जलमग्न हो जाती है थाना परिसर

1973 में सारण मंडल से अलग होकर गोपालगंज जिला अस्तित्व में आया था, लेकिन 50 से अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी इस थाने को एक पक्की और सुरक्षित छत नसीब नहीं हुई। आज आलम यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही भवन की जर्जर छत से पानी टपकने लगता है। थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को पूरी रात खड़े होकर बितानी पड़ती है। कागजात, हथियार और खुद की सुरक्षा को लेकर हर समय खतरा बना रहता है। प्रशासनिक अधिकारी कई बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं।

वीआईपी क्षेत्र, फिर भी उपेक्षा का शिकार

विजयीपुर प्रखंड कोई आम इलाका नहीं है। यह स्थानीय जदयू विधायक और बिहार सरकार में ग्रामीण कार्य विभाग मंत्री सुनील कुमार का गृह प्रखंड है। आजादी के बाद से अब तक क्षेत्र में कई विधायक बदले, लेकिन विजयीपुर थाने की किस्मत नहीं बदली।

अदालती दांव-पेच में अटका नवनिर्माण

थाने के नए भवन के लिए सरकार ने प्रखंड कै बंधौरा पंचायत के कैथवलिया मौजा में थाने के नए भवन का निर्माण कार्य शुरू किया। लगभग 8 फीट ऊंची बाउन्ड्री वॉल का काम भी पूरा हो चुका था, लेकिन जमीन और कानूनी विवाद के कारण मामला पिछले पांच वर्षों से अदालत में विचाराधीन है। अब सवाल यह है कि क्या 

अदालती पेंच कै। इस दलदल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकती। अब देखना यह होगा कि कानून के इन रखवालों को इसी जर्जर और टपकती छत के नीचे ड्यूटी बजाने को मजबूर होना पड़ेगा। या अदालत के फैसले के बाद उड़ान मिलेगी। 

गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट