गोपालगंज : जिले के भोरे थाना क्षेत्र में एक किशोरी के साथ हुई दुष्कर्म की घटना में न्यायालय ने स्पीडी ट्रायल के आधार पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने दोनों दोषियों को 30-30 वर्ष के कारावास और 25-25 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। बता दें कि 24 अगस्त 2022 को भोरे थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक किशोरी के साथ दुष्कर्म की गंभीर घटना घटित हुई थी।
पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर भोरे पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू की थी
इस संबंध में पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर भोरे पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू की थी। पुलिस अनुसंधान के दौरान संकलित वैज्ञानिक साक्ष्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने दो आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र माननीय न्यायालय में समर्पित किया था। जिसमें पियरौटा गांव के मनेजर साह के पुत्र संदीप साह और बैरौना गांव क नागेश्वर माझी के पुत्र रघु माझी शामिल थे।
3 वर्ष बाद आया कोर्ट का फैसला
भोरे थाना इलाके के चर्चित मामले में न्यायालय एडीजे-6-सह-पॉक्सो विशेष न्यायालय गोपालगंज द्वारा दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने भादवि की धारा 376(3) एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा-6 के तहत दोनों को सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक अभियुक्त को 30-30 वर्ष का कठोर कारावास और 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। साथ ही कोर्ट ने जुर्माना की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक अभियुक्त को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतने को कहा है।
क्या बोले विशेष लोक अभियोजक
इस पूरे मामले में विशेष लोक अभियोजक दरोगा सिंह द्वारा न्यायालय में बेहद प्रभावी पैरवी की गई। पुलिस द्वारा अनुसंधान के दौरान जुटाए गए ठोस साक्ष्यों, गवाहों की समय पर पेशी और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के फलस्वरूप स्पीडी ट्रायल संचालित किया गया, जिससे कम समय में न्याय सुनिश्चित कराते हुए अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई जा सकी। यह फैसला समाज में इस तरह के जघन्य अपराध करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट