सम्राट चौधरी की जाति को हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका, कुशवाहा जाति को लेकर सुनाया अहम फैसला

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जाति को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। पटना हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि कुशवाहा (कोइरी) अति पिछड़ी जाति का आरक्षण नहीं ले सकते।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Apr 23, 2026, 11:03:00 AM

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जाति को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। पटना हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि  कुशवाहा (कोइरी) अति पिछड़ी जाति का आरक्षण नहीं ले सकते।  क्योंकि  दांगी और कुशवाहा दो अलग-अलग जाति हैं। ऐसे में ईबीसी (अति पिछड़ी जाति) के लिए आरक्षित सीट पर ओबीसी का उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकता है।  

दरअसल दांगी जाति को कुशवाहा जाति की ही उप जाति माना जाता है। लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दोनों जातियां अलग समूह में आती है। कुशवाहा जहां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में आता है, वहीं दांगी अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) में शामिल है। ऐसे में कुशवाहा और दांगी जाति अलग है और कुशवाहा जाति के लोग दांगी को मिले आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते।

पटना हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि दांगी और कुशवाहा दो अलग-अलग जातियां हैं और दोनों की श्रेणी भी भिन्न है। कुशवाहा समुदाय जहां अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है, जबकि दांगी समुदाय अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल है। इस आधार पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षित सीट पर OBC कुशवाहा जाति का व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह और शैलेंद्र सिंह की खंडपीठ ने पश्चिमी चंपारण के बैरिया प्रखंड की बगही बघमहारपुर पंचायत के मुखिया मनोज प्रसाद की याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। ईबीसी के लिए आरक्षित पंचायत सीट पर ओबीसी वर्ग से संबंधित व्यक्ति चुनाव लड़ने का हकदार नहीं है। कोर्ट ने आवेदक के दावे को निराधार बताते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।

बता दें कि यह पूरा मामला पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया प्रखंड स्थित वजहा वसमहापुर पंचायत से जुड़ा है। जहां 2021 पंचायत चुनाव में मनोज प्रसाद मुखिया निर्वाचित हुए थे। उनके निर्वाचन को उसी पंचायत के संतोष कुमार ने चुनौती दी थी। उन्होंने  आरोप लगाया कि मनोज प्रसाद ने जाति प्रमाणपत्र में गड़बड़ी कर आरक्षित सीट का लाभ उठाया। अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की गई है।

शिकायत के बाद मामला राज्य निर्वाचन आयोग के पास पहुंचा। आयोग के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि मनोज प्रसाद कुशवाहा (कोइरी) जाति से संबंधित हैं, जो ओबीसी श्रेणी में आती है। ऐसे में उनका चुनाव गलत है। आयोग ने मुखिया मनोज प्रसाद का चुनाव रद्द कर दिया।

मुखिया पद से हटाए जाने के बाद मनोज प्रसाद ने निर्वाचन आयोग के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की डबल बैंच ने स्पष्ट किया कि ईबीसी आरक्षित सीट पर ओबीसी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकता। क्योंकि क्योंकि दांगी और कुशवाहा दो अलग-अलग जाति हैं। इस कारण से कोर्ट ने  मनोज प्रसाद की याचिका खारिज कर दी। चुनाव आयोग ने मुखिया मनोज प्रसाद का चुनाव रद्द कर दिया था।