बिहार के बगहा में नन्हें हाथों ने ऐतिहासिक कार्य कर मिसाल कायम की है। गांव के स्कूली बच्चों ने चंदा कर बांस बल्ली इकट्ठा कर न केवल चचरी पुल बनाया है बल्कि रामनगर गोबर्धना डुमरी समेत दोन के 22 गांवों से भंग सड़क सम्पर्क बहाल क़र वाहवाही बटोरी है।
सिस्टम पर करारा प्रहार की तस्वीरें रामनगर के डुमरी से सामने आईं हैं, जहां पहाड़ी नाला पर बरसात के बाद बाढ़ में पुलिया ध्वस्त होने के कारण इन आधा दर्जन छात्रों ने महज़ दिनभर में गांव के लोगों से बांस मांगकर इकट्ठा किया। फ़िर क्या उनके जेहन में दौड़ रहीं कनेक्टिविटी ने उन्हें इंजीनियर बना डाला। लिहाजा ये बच्चे आज सुर्खियों में आकर सरकार औऱ प्रशासन को आईना दिखा रहे हैं।
खेलने कूदने और पढ़ने लिखने वाले ग्रामीण बच्चों की एक टीम ने करीब 15 फीट लंबे बांस का चचरी पुल बनाकर सरकार और सिस्टम को आईना दिखाया है। तभी तो इनकी कारस्तानी के क़ायल दोन वासी मौसम साफ़ होते इन्हें पुरस्कृत औऱ सम्मानित करने पहुंचे हैं।
दरअसल पश्चिम चम्पारण ज़िला अंतर्गत रामनगर प्रखंड के दोन का ये 22 गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली लाइफलाइन डुमरी मुख्य सड़क का एप्रोच पुल यानी पुलिया बाढ़ की पानी में ध्वस्त हो गया था। लिहाजा लोगों को सवारी तो दूर, पैदल आने-जाने के लिए भी उफनते पानी को पार करना पड़ रहा था।
इसी ध्वस्त पुल के पास रामनगर डुमरी गांव कुछ बच्चे खेल रहे थे। जब उन्होंने दोन इलाके के गांव की महिलाओं को पानी पार करते हुए परेशान देखा तो बच्चों ने मिलकर राय बनाई औऱ एकजुटता दिखाई । फ़िर क्या गांव वालों से चंदा में बांस लिया और खुद ही चचरी का पुल बना डाला।
बताया जा रहा है कि रामनगर स्थित डुमरी में हुईं इस अनोखी पहल में 10 वर्षीय पुष्पांजलि ख़ास तौर पर शामिल है। क्योंकि पुष्पांजलि का जज्बा देखकर उनके पिता भी सहयोग में जुट गए। नाबालिग बच्चों के इस ऐतिहासिक काम को देख दोन गांव के लोगों ने उन्हें सम्मानित करने पहुंच गए तब वहां माहौल किसी बड़े समारोह का शक्ल अख्तियार क़र लिया औऱ सबकी जुबान पर चर्चा तेज़ हों गईं।
इधर बांस के सहारे चचरी पुल बनाने वाले बच्चों का कहना है कि उनका सपना है पढ़-लिखकर इंजीनियर बने और अपने दोन क्षेत्र के विकास में सहयोग करें। बता दें कि खेलने-कूदने की उम्र में बड़ी सोच के बाद एकजुट छात्रों नें जिम्मेदारी उठाकर यह साबित कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत नई पीढ़ी से हो सकती है बशर्ते समाज औऱ देशहित में सच्ची लगन औऱ कठिन परिश्रम लोगों की सेवा के लिए बगैर किसी लोभ लालच या भेदभाव के हों।
बगहा से परवेज आलम की रिपोर्ट