बेगूसराय में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताकर बिहार की सियासत में चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है। बेगूसराय के प्रेक्षा गृह में आयोजित पार्टी के गरीब संवाद यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण की समीक्षा का मतलब आरक्षण समाप्त करना नहीं है। उनका कहना था कि समीक्षा के जरिए यह देखा जाना चाहिए कि आरक्षण का लाभ किन लोगों तक पहुंचा और कौन-से वर्ग अब भी इससे वंचित हैं।
‘समीक्षा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं’
मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में समय-समय पर समीक्षा होती है। ऐसे में आरक्षण की समीक्षा की बात करने पर लोगों को डराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के बयान मात्र से आरक्षण समाप्त नहीं हो जाता। उनके मुताबिक आरक्षण वंचित वर्गों के लिए महत्वपूर्ण और पवित्र व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को अधिकार और अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाया जाना चाहिए कि अब तक कितने लोगों को आरक्षण का लाभ मिला और कितने लोग अभी भी इससे वंचित हैं। उनका जोर इस बात पर रहा कि निर्णय केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक आंकड़ों और सामाजिक स्थिति के अध्ययन के आधार पर होना चाहिए। इसी तरह की मांग वे पहले भी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण को लेकर उठा चुके हैं।
‘वंचितों तक पहुंचे आरक्षण का लाभ’
सुमन ने कहा कि आरक्षण का लाभ समाज के उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, जो लंबे समय से पीछे हैं। उन्होंने जरूरत के अनुसार आरक्षण में रोटेशन की व्यवस्था पर भी विचार करने की बात कही। उनका कहना था कि सभी लोग मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाने पर विचार करें, जिससे गरीब और वंचित तबके को उसका अधिकार मिल सके।
आरक्षण की समीक्षा और अनुसूचित जाति के भीतर उप-वर्गीकरण को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस पहले से जारी है। सुमन इसके समर्थन में लगातार बयान देते रहे हैं, जबकि एनडीए के ही कुछ नेताओं ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया है।
‘हम पार्टी को मजबूत करें, तभी हक की लड़ाई लड़ेंगे’।
गरीब संवाद यात्रा के दौरान मंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से हम पार्टी को मजबूत करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि संगठन मजबूत होगा, तभी गरीबों, वंचितों और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सकेगी।
कार्यक्रम में आरक्षण, सामाजिक हिस्सेदारी और गरीबों के अधिकारों को लेकर चर्चा हुई। संतोष सुमन के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ समाज के सभी वंचित वर्गों तक किस तरह प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच मतभेद भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं।
फिलहाल बेगूसराय में दिया गया संतोष सुमन का यह बयान बिहार की आरक्षण बहस में एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान के रूप में सामने आया है।
बेगूसराय से अजय कुo शास्त्री की रिपोर्ट