बेगूसराय : जिले के मंसूरचक प्रखंड से विद्यालय में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। समसा-2 पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय नयाटोल बलुआ सड़क में एक बीपीएससी शिक्षक के कथित रूप से निर्धारित समय के बाद विद्यालय पहुंचने और ग्रामीणों के सवाल पर कथित तौर पर आपत्तिजनक अंदाज में जवाब देने का मामला सामने आया है। घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सवाल पूछे जाने पर शिक्षक गुस्सा गए
ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार को विद्यालय में शिक्षक करीब साढ़े 10 बजे पहुंचे। शिक्षक के देर से विद्यालय पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनसे सवाल किया कि आखिर वे निर्धारित समय पर स्कूल क्यों नहीं आते हैं। इसी दौरान शिक्षक और ग्रामीणों के बीच बातचीत हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि सवाल पूछे जाने पर शिक्षक ने कथित तौर पर कहा कि साढ़े 10 बजे आएंगे, तुमको जो करना है कर लो। शिक्षक के कथित इस जवाब के बाद मामला चर्चा में आ गया।
सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की समय पर उपस्थिति बेहद जरूरी है - ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षकों की समय पर उपस्थिति बेहद जरूरी है। जब शिक्षक ही समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कराने और विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की है।
BPSC के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों से ग्रामीणों को काफी उम्मीदें हैं
बताया जा रहा है कि बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों से ग्रामीणों को काफी उम्मीदें हैं। ऐसे में यदि कोई शिक्षक विद्यालय के निर्धारित समय को लेकर लापरवाही बरतता है या ग्रामीणों के सवालों को गंभीरता से नहीं लेता है, तो इससे सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और अनुशासन को लेकर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका आरोप है कि विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति और समय पालन की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
इस पूरे मामले में संबंधित शिक्षक का पक्ष सामने नहीं आया है
हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित शिक्षक का पक्ष सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बुधवार को शिक्षक के देर से विद्यालय पहुंचने के पीछे उनकी ओर से क्या कारण बताया गया। ऐसे में शिक्षक पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और विद्यालय में शिक्षक की कथित देरी तथा ग्रामीणों से हुई बातचीत की जांच कर कोई कार्रवाई करता है या नहीं। फिलहाल, ग्रामीणों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जोर पकड़ रही है।
बेगूसराय से अजय शास्त्री की रिपोर्ट