पुलिस के डर से पुरुष घर छोड़ भागे!, महिलाएं रो रही-जान दे देंगे, पप्पू यादव-राजद सांसद भी उतरे
मोतिहारी पिपरा कोठी के वाटगंज में किसान इस जमीन को अपनी बताते हुए विरोध आंदोलन कर रहे हैं। वहां पुरुष घर छोड़कर गायब थे, जबकि घरों में केवल महिलाएं ही मिलीं।
मोतिहारी को सत्याग्रह की धरती कहा जाता है। यहां के किसानों ने अपने आंदोलनों के दम पर नील की खेती जैसी व्यवस्था को समाप्त कराया था। ठीक उसी तरह एक बार फिर किसानों की जमीन उनसे छीनी जा रही है। ऐसी स्थिति में सत्याग्रह की धरती पर फिर से आंदोलन की शुरुआत हो गई है। पिपरा कोठी के वाटगंज में लगभग 17 एकड़ जमीन को प्रशासन द्वारा सरकारी भूमि बताते हुए उसकी जमाबंदी रद्द कर दी गई है। वहीं किसान इस जमीन को अपनी बताते हुए विरोध आंदोलन कर रहे हैं। वहां पुरुष घर छोड़कर गायब थे, जबकि घरों में केवल महिलाएं ही मिलीं।
महिलाओं ने बताया कि उनकी जमीन जबरन छीन ली गई है। वे पिछले 70 वर्षों से इस जमीन की खेती कर रही हैं। उनका कहना है कि रात में पुलिस आकर उनके साथ मारपीट करती है, जिसके डर से पुरुष गांव छोड़कर भाग गए हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस घर में घुसकर महिलाओं और बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, सरकार ने उनकी जमीन जबरन अधिग्रहित कर वाटर पार्क के लिए दे दी है। इसी जमीन को लेकर किसान पिछले तीन महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। शुरुआत में गांव की महिलाएं कुछ भी बोलने से डर रही थीं। उन्हें आशंका थी कि कुछ कहने पर पुलिस उनके खिलाफ भी केस दर्ज कर सकती है। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की।
आंखों में आंसू लिए महिलाओं ने बताया कि वे इस जमीन पर 70 साल से अधिक समय से खेती कर रही हैं। जमीन का दाखिल-खारिज हुआ है, रसीद कटती रही है और सरकार की ओर से दो बार मुआवजा भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद अचानक जमीन को सरकारी घोषित कर उनसे छीन लिया गया। जब किसानों ने विरोध किया, तो प्रशासन ने उन पर दो-दो मुकदमे दर्ज कर दिए और पुरुषों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।
ग्रामीण गुलजारी देवी ने बताया कि वे 70-80 वर्षों से इस जमीन की खेती कर रही हैं और इसी से उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। उन्होंने कहा कि अगर जमीन छिन गई, तो उनका जीवन संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस घर में घुसकर महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट कर रही है।
उन्होंने कहा-हम मर जाएंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। एक अन्य महिला ने कहा कि आजादी से पहले अंग्रेज किसानो पर अत्याचार करते थे, लेकिन आजादी के बाद भी किसानों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीन छीनकर उनके जीवन-यापन का साधन खत्म किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब तक उनके शरीर में जान है, वे अपनी जमीन के लिए लड़ती रहेंगी। एकशीला देवी ने कहा कि यही जमीन उनका आधार है। जब वे अपनी जमीन पर जाती हैं, तो पुलिस मारपीट करती है और केस दर्ज कर जेल भेजने की धमकी देती है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा वहां मौजूद भी नहीं था, फिर भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
पुलिस के डर से उनका खाना-पीना भी प्रभावित हो गया है। किसानों का दर्द जानने के लिए पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव गांव पहुंचे। किसान सभा में केवल महिलाएं ही नजर आईं। जब उन्होंने कारण पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि रात में 50 से अधिक पुलिसकर्मी गांव में आए और मारपीट कर दो लोगों को पकड़कर ले गए। इसी डर से पुरुष गांव छोड़कर भाग गए हैं।
इस पर पप्पू यादव ने कहा कि वे किसानों की लड़ाई पटना हाईकोर्ट में लड़ेंगे और तब तक लड़ते रहेंगे, जब तक किसानों को उनकी जमीन वापस नहीं मिल जाती। वहीं, शुक्रवार को राजद सांसद सुधाकर सिंह ने भी किसानों के बीच सभा की और विवादित जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर यह संदेश दिया कि जमीन किसानों की है और वही रहेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन कोई नहीं छीन सकता।
रिपोर्टर ... सोहराब आलम ....जिला पूर्वी चम्पारण
Trending News