नीतीश को हराने वाले विजय कृष्ण का RJD से इस्तीफा, एक लाइन की चिट्ठी में कहा अलविदा

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को आज बुधवार को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विजय कृष्ण ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Dec 10, 2025, 6:10:00 PM

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को आज बुधवार को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विजय कृष्ण ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव को अपना इस्तीफा भेज दिया है। इस अचानक उठाए गए कदम ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विजय कृष्ण ने लालू यादव को भेजे पत्र में लिखा है- 'मैंने दलगत राजनीति, सक्रिय राजनीति से अलग हो जाने का निर्णय लिया है. अतः राष्ट्रीय जनता दल की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं. कृप्या स्वीकार करें.'

विजय कृष्ण वही नेता हैं जिन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ संसदीय सीट से उस समय के बड़े नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हराकर राजनीतिक हलकों में तहलका मचा दिया था। राजपूत समुदाय से आने वाले विजय कृष्ण को उस जीत के बाद राजनीतिक रूप से एक मजबूत चेहरे के रूप में देखा जाने लगा।

हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में RJD ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने जेडीयू का दामन थाम लिया। लेकिन पार्टी बदलने का यह सफर ज्यादा लंबा नहीं चला और एक साल के भीतर ही वे फिर से RJD में लौट आए थे।

अब, एक बार फिर से उनका इस्तीफा चर्चा का विषय बन गया है। 

साठ के दशक से राजनीति में सक्रिय विजय कृष्ण ने समाजवादी युवा सभा से राजनीतिक सीढ़ियां चढ़नी शुरू की। 1977 में पहली बार जनता पार्टी के बिहार महासचिव बने। जनता दल के टिकट पर बाढ़ विधानसभा सीट से 1990 और 1995 में लगातार दो बार जीतकर विधायक बने। लालू के साथ-साथ राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बने। 2004 में लालू यादव ने उनको बाढ़ से नीतीश के खिलाफ लोकसभा लड़ा दिया और वो जीत भी गए। 1999 के चुनाव में नीतीश ने उनको हराया था तो वो कोर्ट चले गए थे लेकिन वह चुनाव याचिका खारिज कर दी गई थी।

साल 2009 में एक मर्डर केस में अपने बेटे के साथ फंस गए। इस केस में कोर्ट ने 2013 में विजय समेत चार आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, साल 2022 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया। फिर करीब 10 साल जेल में रहने के बाद वो बाहर निकले थे।