आज बिहार विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान डेडीकेटेड एथेनॉल प्लांट यानी DEP का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधान पार्षद सच्चिदानंद राय ने राज्य में बंद हो रहे एथेनॉल प्लांटों को लेकर सरकार से जवाब मांगा और कहा कि यह सिर्फ उद्योग का मामला नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एथेनॉल प्लांटों के बंद होने से औद्योगिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इससे हजारों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस दिशा में ठोस और त्वरित कदम उठाए जाएं।
इस मुद्दे पर दिनेश प्रसाद सिंह और सुनील सिंह ने भी समर्थन जताया और कहा कि एथेनॉल उद्योग को बचाना राज्यहित में जरूरी है।
जवाब में उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि पहले बिहार को 46 करोड़ लीटर एथेनॉल का कोटा मिला था, जो घटकर लगभग 35 करोड़ लीटर रह गया है। उन्होंने कहा कि 14 डेडीकेटेड एथेनॉल प्लांट में से 11 के साथ भारत सरकार का समझौता हुआ था, जबकि बाद में खुले कुछ प्लांटों के साथ औपचारिक अनुबंध नहीं हुआ।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार केंद्र से बातचीत कर रही है और मूल समझौता वाले प्लांटों की मांग बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं।
मंत्री के जवाब पर संतोष जताते हुए सच्चिदानंद राय ने इसे सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उद्योग बिहार में रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बन सकता है और राज्य व केंद्र के समन्वय से इस क्षेत्र को फिर से नई गति मिलेगी।