कर्नाटक में डीके शिवकुमार मंत्रिमंडल के गठन के कुछ ही दिनों बाद विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने हिस्से में आए विभाग से असहमति जताते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे सरकार के भीतर मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, रेड्डी लंबे समय से बेंगलुरु शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी चाहते थे। हालांकि विभागों के अंतिम आवंटन में उन्हें जल संसाधन विभाग सौंपा गया। इस फैसले से असंतुष्ट रेड्डी ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की और मंत्री पद छोड़ने का निर्णय लिया।
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि जिस विभाग की उन्हें जिम्मेदारी दी गई है, उसे स्वीकार करना उनके लिए संभव नहीं है। उनका कहना था कि वह अपनी इच्छा और सिद्धांतों के विपरीत जाकर काम नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री पद छोड़ने के बावजूद वह विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहेंगे।
रेड्डी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर पूर्व में किए गए आश्वासन को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री ने 2023 में व्यक्तिगत रूप से उनके आवास पर जाकर बेंगलुरु शहरी विकास विभाग देने का भरोसा दिलाया था। इसी भरोसे के आधार पर उन्हें उम्मीद थी कि विभाग आवंटन में उनकी प्राथमिकता का सम्मान किया जाएगा।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने स्वयं किसी विशेष विभाग की मांग नहीं की थी, बल्कि उन्हें जो आश्वासन दिया गया था, उसी के अनुरूप निर्णय की अपेक्षा थी। उनके अनुसार, अंतिम फैसले ने उनके विश्वास को आहत किया है।
गौरतलब है कि गुरुवार देर रात सरकार ने 13 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया था। इसी सूची में रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। विभाग आवंटन के तुरंत बाद उन्होंने संकेत दे दिए थे कि यदि उन्हें उनकी अपेक्षा के अनुरूप जिम्मेदारी नहीं मिली तो वह पद छोड़ने पर विचार करेंगे।
अपने इस्तीफे में रेड्डी ने मुख्यमंत्री को मंत्री पद सौंपने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही लिखा कि वह अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर कार्य नहीं कर सकते। इसी कारण उन्होंने कैबिनेट से अलग होने का फैसला लिया और इस्तीफा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया।
सरकार के गठन के शुरुआती चरण में ही सामने आए इस घटनाक्रम को शिवकुमार सरकार के लिए एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष अब सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है।