विधानसभा में उठा EWS उम्र सीमा छूट का मुद्दा, जानिए मंत्री विजय चौधरी ने क्या दिया जवाब

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में आज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्र-छात्राओं को उम्र सीमा में छूट देने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 23, 2026, 3:37:00 PM

 बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में आज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्र-छात्राओं को उम्र सीमा में छूट देने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। जेडीयू विधायक देवेश कांत सिंह ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सरकारी नौकरियों और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट देने पर कोई विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई अभ्यर्थी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण समय पर तैयारी नहीं कर पाते, जिससे वे उम्र सीमा पार कर जाते हैं और अवसर से वंचित हो जाते हैं।

इस सवाल ने सदन का तापमान बढ़ा दिया, क्योंकि बिहार के हजारों युवा लंबे समय से इस मांग को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से आवाज उठा रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा और कानूनी अड़चनों की परतें खोलीं.

प्रश्नकाल में विधायक ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई छात्र आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और सामाजिक दबावों के कारण समय पर तैयारी नहीं कर पाते. ऐसे में वे उम्र सीमा पार कर जाते हैं और नौकरी के अवसर खो देते हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य इस वर्ग को राहत देने पर विचार कर रहा है.

विधायक ने चर्चा के दौरान गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अन्य जगहों पर इस मुद्दे पर विमर्श हो सकता है, तो बिहार में भी इस दिशा में पहल होनी चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य वर्गों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट का लाभ मिलता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी विशेष प्रावधान होना चाहिए

मंत्री विजय चौधरी ने जवाब में कहा कि EWS से जुड़ा मूल प्रावधान केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत लागू है. इस अधिनियम में आयु सीमा में छूट का कोई प्रावधान नहीं है और इसमें बदलाव करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य केवल केंद्र के कानून के अनुरूप नियम लागू कर सकता है.

मंत्री ने यह भी कहा कि सदस्य द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सरकार अध्ययन कर सकती है. यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस विषय में कोई संशोधन या दिशा-निर्देश जारी करती है, तो राज्य सरकार उस पर विचार कर सकती है.

भले ही मंत्री ने कानूनी सीमाओं का हवाला दिया, लेकिन उन्होंने पूरी तरह दरवाजे बंद नहीं किए हैं. विजय चौधरी ने यह भी कहा कि अगर अन्य राज्यों द्वारा इस तरह की छूट दी गई है, तो सरकार उन तथ्यों और संभावनाओं का अध्ययन करा सकती है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में केंद्र सरकार इस अधिनियम में कोई संशोधन करती है, तो बिहार सरकार उसे सहर्ष लागू करने पर विचार करेगी. सदन में हुई इस चर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही अभी राहत न मिली हो, लेकिन EWS छात्रों की समस्या अब सरकार की ‘प्राथमिकता सूची’ में शामिल हो गई है