कांस्टीट्यूशन क्लब में स्वामी सहजानंद सरस्वती जयंती समारोह, युवा चेतना के बैनर तले आयोजन

नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब आफ इंडिया के सभागार में देश के महान किसान मजदूर नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती जयंती समारोह का आयोजन युवा चेतना के तत्वावधान में किया गया।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 12, 2026, 10:52:00 PM

नई दिल्ली के Constitution Club of India के सभागार में देश के महान किसान-मजदूर नेता Swami Sahajanand Saraswati की जयंती युवा चेतना के तत्वावधान में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी, B. R. Gavai, भारत सरकार के कपड़ा मंत्री Giriraj Singh, जल शक्ति विभाग के राज्य मंत्री डॉ. Raj Bhushan Choudhary, युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह तथा Sampurnanand Sanskrit Vishwavidyalaya के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए समर्पित किया। वे सामाजिक न्याय आंदोलन के अग्रदूत थे, जिन्होंने शोषित वर्ग को संगठित कर उन्हें नई दिशा दी।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती वंचितों के भगवान समान थे। उन्होंने संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद निर्बलों के अधिकारों के लिए संघर्ष का मार्ग चुना। उन्होंने युवा चेतना द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने जमींदारी प्रथा के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष किया और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसान और मजदूरों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद ने स्वामी जी को गरीबों और किसानों का महानायक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रोहित कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती सामाजिक न्याय के मसीहा थे और आज भी उनके विचार प्रासंगिक हैं।

समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी और अन्य अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन स्वामी सहजानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।