राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 एवं नियमावली, 2010 के अंतर्गत 'लंबित' मामलों की परिभाषा को स्पष्ट किया है। प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ताओं और उप समाहर्ताओं को पत्र लिखकर तीन माह के अंदर भूमि विवाद के मामले को निपटाने का निर्देश दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि स्टे ऑर्डर वाले मामले ही लंबित माने जाएंगे। सक्षम प्राधिकार एवं अपीलीय प्राधिकार को मामलों का निष्पादन संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत करना है। वहीं, उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भूमि विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान सामाजिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
विभाग ने सभी समाहर्ताओं को निर्देश दिया है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन करें। विभाग के प्रधान सचिव ने आरसीएमएस या बिहार भूमि पोर्टल पर दायर मामलों की नियमित समीक्षा और प्रभावी पर्यवेक्षण करने को कहा है।
सरकार ने राजस्व न्यायालयों में चल रहे मामलों के लिए पहले से तय समय-सीमा को फिर से सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है. दाखिल-खारिज, अपील, जमाबंदी रद्दीकरण, लगान निर्धारण, बटाइदारी वाद, अतिक्रमण और भू-हदबंदी जैसे अधिकांश मामलों को 30 से 90 दिनों के भीतर निपटाना होगा. भू-मापी जैसे तकनीकी मामलों के लिए 7 से 11 दिन की अवधि तय है, ताकि जमीन माप से जुड़े विवाद जल्दी सुलझ सकें.
आरसीएमएस और बिहार भूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों के समय-सीमा में निष्पादन को हर हाल में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. विभाग ने स्पष्ट कहा है कि लापरवाही, विलंब या उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जायेगी.
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में देरी सीधे जनता के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और इससे समझौता नहीं किया जायेगा.