प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि बिहार में अपराध को लेकर बोलने का नैतिक अधिकार विपक्ष पूरी तरह खो चुका है। जिन लोगों के शासनकाल में अपराधी सत्ता के संरक्षण में खुलेआम घूमते थे, आज वही लोग कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। यह चिंता नहीं, बल्कि शुद्ध राजनीतिक पाखंड है।
बिहार की जनता भूली नहीं है कि विपक्ष के दौर में अपहरण एक उद्योग बन चुका था, फिरौती आम बात थी, हत्या और बलात्कार की खबरें रोज़मर्रा का हिस्सा थीं। थाने अपराधियों के अड्डे बने हुए थे और आम आदमी सूरज ढलते ही घर से निकलने से डरता था। उस समय बिहार में कानून का नहीं, बंदूक का राज था। यही वजह है कि उस दौर को जनता ने “जंगल राज” का नाम दिया और लोकतंत्र के ज़रिए उसे सत्ता से बाहर कर दिया।
आज का बिहार पूरी तरह बदला हुआ है। आज कानून का राज किसी बयान या प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्रवाई से साबित हो रहा है। अपराधियों के खिलाफ लगातार छापेमारी हो रही है, गिरफ्तारी हो रही है, जेल भेजा जा रहा है और किसी को भी बख्शा नहीं जा रहा। सरकार की नीति बिल्कुल साफ है—अपराधी या तो सुधरेंगे या सज़ा पाएँगे।
विपक्ष को जनता को उपदेश देने से पहले यह बताना चाहिए कि जब वे सत्ता में थे तब माफ़िया राज क्यों फल-फूल रहा था? तब प्रशासन क्यों बेबस था और जनता क्यों असुरक्षित महसूस करती थी?
आज विपक्ष झूठे आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक विफलता, जनाधार की कमी और हताशा को छुपाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन बिहार की जनता सब समझती है। जनता जानती है कि कौन अपराधियों के साथ खड़ा था और कौन उनके खिलाफ।
झूठ बोलने से सच नहीं बदलता, चिल्लाने से जंगल राज वापस नहीं आता और अफ़वाह फैलाने से जनता भ्रमित नहीं होती। बिहार अब पीछे नहीं जाएगा। बिहार सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ेगा, अपराध के खिलाफ डटकर लड़ेगा और जंगल राज की राजनीति को हमेशा के लिए नकारता रहेगा।