सदन में उठा कंप्यूटर टीचर की कमी का मसला, शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब

बिहार में कंप्यूटर शिक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग के बीच राज्य सरकार ने सकारात्मक संकेत दिया है। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में बड़े पैमाने पर कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 24, 2026, 1:27:00 PM

बिहार में कंप्यूटर शिक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रही मांग के बीच राज्य सरकार ने सकारात्मक संकेत दिया है। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में बड़े पैमाने पर कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल प्राथमिकता सामान्य विषयों के शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को दी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद कंप्यूटर शिक्षकों की बहाली पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

बिहार विधानसभा के प्रश्नकाल में सहरसा से विधायक आईपी गुप्ता ने राज्य के विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों की बहाली कब तक की जाएगी। विधायक ने कहा कि आज के समय में तकनीकी शिक्षा की भूमिका काफी अहम हो गई है और सरकारी विद्यालयों में भी छात्रों को समान अवसर मिलना चाहिए। इस पर जवाब देते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार इस विषय को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि कंप्यूटर शिक्षकों की बहाली की योजना तैयार की जा रही है, लेकिन वर्तमान में राज्य में सामान्य शिक्षकों की कमी को दूर करना प्राथमिकता है।

शिक्षा मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि राज्य में बड़े पैमाने पर सामान्य विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। कई विद्यालयों में अब भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार पहले इन रिक्तियों को भरने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि जब सामान्य शिक्षकों की नियुक्ति पूरी हो जाएगी, तब कंप्यूटर शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार चरणबद्ध तरीके से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

आज के डिजिटल दौर में कंप्यूटर शिक्षा का महत्व तेजी से बढ़ा है। केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया पहल और ऑनलाइन शिक्षा के विस्तार के कारण विद्यालय स्तर पर तकनीकी ज्ञान आवश्यक हो गया है। कई सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर प्रयोगशालाएं तो स्थापित कर दी गई हैं, लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण उनका पूरा लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र विशेष रूप से इस कमी से प्रभावित हैं। निजी विद्यालयों में जहां कंप्यूटर शिक्षा नियमित रूप से दी जा रही है, वहीं सरकारी स्कूलों में संसाधनों के बावजूद शिक्षकों की अनुपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में विधानसभा में यह मुद्दा उठना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्री ने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में तकनीकी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए अलग से नीति लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के आधुनिकीकरण पर गंभीरता से काम कर रही है। आने वाले समय में विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों का विस्तार किया जाएगा, ताकि छात्र प्रतिस्पर्धी दौर में पीछे न रह जाएं। हालांकि मंत्री ने कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की, लेकिन उन्होंने आश्वस्त किया कि सामान्य शिक्षकों की भर्ती पूरी होते ही इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार तकनीकी शिक्षा को नजरअंदाज नहीं कर रही है, बल्कि प्राथमिकताओं के आधार पर काम कर रही है।