RLM में अब खुलकर बगावत, विधायक रामेश्वर महतो बोले— राजनीति छोड़ दूंगा, पर उपेंद्र कुशवाहा के साथ नहीं जाऊंगा

सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में जारी सियासी उथल-पुथल के बीच विधायकों के टूटने को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Jan 06, 2026, 11:44:00 AM

सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में जारी सियासी उथल-पुथल के बीच विधायकों के टूटने को लेकर सस्पेंस बरकरार है। हालांकि अब बागी विधायकों ने अपने इरादे काफी हद तक साफ कर दिए हैं। सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी से RLM विधायक रामेश्वर महतो ने बड़ा बयान दिया है।

रामेश्वर महतो ने दो टूक कहा कि वे राजनीति से संन्यास ले सकते हैं, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के साथ आगे कभी राजनीति नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उपेंद्र कुशवाहा जो कहते हैं, वह करते नहीं हैं। विधायक का यह बयान पार्टी के अंदर गहरी टूट की ओर इशारा कर रहा है।

बताया जा रहा है कि RLM के तीनों बागी विधायक लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं और आज तीनों की एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि फिलहाल यह साफ नहीं है कि तीनों विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे।

जब रामेश्वर महतो से पूछा गया कि नाराजगी का क्या कारण हैं। तो उन्होंने कहा कि ये (उपेंद्र कुशवाहा) बात लोहिया और जगदेव प्रसाद की करते हैं। खुद को समाजवादी बताते हैं। काम क्या किया? पूरे परिवार को एक बार में सेट कर दिया। लालू प्रसाद यादव की मजबूरी थी कि जेल जा रहे थे तो पत्नी (राबड़ी देवी) को सीएम बनाया। आप कौन सा जेल जा रहे थे।

राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के 20 साल बाद विधानसभा चुनाव जीतकर उनके बेटे विधायक बने। आपका बेटा (दीपक प्रकाश) कौन सा चुनाव जीतकर आए कि आपने मंत्री बना दिया। ऐसे में सवाल तो बनता है।

उन्होंने कहा कि मुझे पेट भरने के लिए राजनीति नहीं करनी है। जिस दिन पेट भरने की बात आएगी दुकान खोलूंगा, राजनीति नहीं करूंगा। हजारों पार्टी कार्यकर्ता नेता के आगे-पीछे रहते हैं कि एक दिन उनके लिए भी कुछ होगा। इन्होंने सारे पद अपने परिवार में बांट दिए।

जब रामेश्वर महतो से पूछा गया कि उपेंद्र कुशवाहा अगर कार्रवाई करेंगे तो आप लोग क्या करेंगे, इस पर रामेश्वर महतो ने साफ तौर पर जवाब दे दिया और उन्होंने कहा कि 

उनकी कार्रवाई से पहले विधायकी पद से इस्तीफा दे दूंगा। अगर बात नहीं बनी तो राजनीति छोड़ दूंगा। लालच की राजनीति नहीं करता हूं। नीतीश कुमार को पिता तुल्य मानता हूं। उन्होंने मुझे बहुत स्नेह दिया है। संगठन सचिव, MLC बनाया। मैंने जो काम कहा वो कराया। सीतामढ़ी-नेपाल सड़क मेरे निवेदन पर बनवाया।

वह मुझ पर इतना ट्रस्ट करते थे। इन्होंने (उपेंद्र कुशवाहा) मुझे बहला-फुसलाकर उनका साथ छुड़वाया। अब अपने परिवार का भविष्य सेट कर लिया। मेरे भविष्य का क्या होगा? कार्यकर्ता जो इनकी दरी उठाते हैं, उनके भविष्य का क्या होगा?

इसके साथ ही जब उनसे यह सवाल किया गया कि आप किसी पार्टी में जाएंगे या नहीं तो उन्होंने इसका भी जवाब दिया और कहा कि कुछ भी हो सकता है, लेकिन अभी तय नहीं है। बहुत जल्द इस पर बात कर आगे की रणनीति तय करेंगे। एक रास्ता तो लेना ही पड़ेगा। अकेले होने के बाद भी मुझे डर नहीं है।