राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज, महागठबंधन ने दिखाई ताकत

राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज, महागठबंधन ने दिखाई ताकत

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 07, 2026, 5:12:00 PM

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के करीब आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्ताधारी महागठबंधन अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं नेताओं की लगातार बैठकों और मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

रविवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कांग्रेस नेतृत्व की महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर लंबी चर्चा की। करीब दो घंटे से अधिक चली इस बैठक में चुनावी गणित, गठबंधन की मजबूती और दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने को लेकर रणनीति तैयार की गई।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने स्पष्ट संदेश दिया कि गठबंधन के भीतर किसी तरह की असमंजस की स्थिति नहीं है और दोनों सीटों पर जीत को लेकर पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से गठबंधन दलों के विधायकों के लिए सामूहिक रात्रिभोज का आयोजन किया गया है, जबकि झामुमो और कांग्रेस उम्मीदवार संयुक्त रूप से नामांकन प्रक्रिया पूरी करेंगे।

इसी बीच शनिवार शाम एक अन्य मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दे दी। पूर्व राज्यसभा सांसद और उद्योगपति परिमल नाथवानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले। चूंकि नाथवानी पहले ही राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र ले चुके हैं, इसलिए इस मुलाकात को लेकर कई तरह के राजनीतिक अनुमान लगाए जाने लगे।

हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इस मुलाकात को सामान्य बताते हुए किसी भी तरह के राजनीतिक संकेतों से इनकार किया। भूपेश बघेल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति का किसी भी नेता से मिलना असामान्य नहीं माना जाना चाहिए। अजय शर्मा ने भी दोहराया कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और बाहर चल रही अटकलों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

मुख्यमंत्री आवास पर झामुमो के घोषित उम्मीदवार बैद्यनाथ राम भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे नामांकन से जुड़ी तैयारियों के सिलसिले में आए हैं। उन्होंने भी नाथवानी और मुख्यमंत्री की मुलाकात को सामान्य बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी से मिलने की स्वतंत्रता है और इसे लेकर अनावश्यक अर्थ नहीं निकाले जाने चाहिए।

दूसरी ओर, महागठबंधन के सहयोगी दल भाकपा माले ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। गढ़वा में पार्टी कार्यक्रम के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता भाजपा को रोकना है और उनकी पार्टी उसी उम्मीदवार या पक्ष का समर्थन करेगी, जो भाजपा को पराजित करने की स्थिति में होगा।

अरूप चटर्जी ने यह भी कहा कि गठबंधन में शामिल होने के बावजूद उनकी पार्टी को अपेक्षित राजनीतिक भागीदारी नहीं मिली। उन्होंने मंत्री पद और राज्यसभा सीट को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी पार्टी को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था।

राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। ऐसे में छोटे सहयोगी दलों का रुख चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल झारखंड की राजनीति में एक ओर एकजुटता के संदेश दिए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर अंदरूनी असंतोष और संभावित समीकरणों पर चर्चा भी जारी है।