BREAKING : राज्यसभा चुनाव में झामुमो ने बैजनाथ राम पर लगाया दांव

BREAKING : राज्यसभा चुनाव में झामुमो ने बैजनाथ राम पर लगाया दांव

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 06, 2026, 1:59:00 PM

झारखंड में राज्यसभा चुनाव की हलचल के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने एक ऐसा राजनीतिक फैसला लिया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। पार्टी ने लातेहार से कई बार विधायक रह चुके और पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन पार्टी सूत्रों के संकेत बताते हैं कि नेतृत्व ने उनके नाम पर सहमति बना ली है।

राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ उम्मीदवार चयन नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई रणनीति के रूप में देख रहे हैं। लंबे अनुभव और विभिन्न दलों में काम करने के कारण बैद्यनाथ राम को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी संगठन के लिए उपयोगी साबित हुए हैं।

शिक्षण कार्य से सार्वजनिक जीवन तक का सफर

लातेहार जिले के परसही गांव में वर्ष 1967 में जन्मे बैद्यनाथ राम का राजनीतिक सफर पारंपरिक नेताओं से कुछ अलग रहा है। उन्होंने लातेहार स्थित बनवारी साहू कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कदम रखा और ‘सरस्वती शिशु विद्या मंदिर’ में शिक्षक के रूप में कार्य किया।

करीब तीन वर्षों तक अध्यापन से जुड़े रहने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के साथ ही उन्होंने राजनीति में अपनी नई पारी शुरू की और चुनावी राजनीति में प्रवेश किया।

कई दलों में निभाई अहम भूमिका

बैद्यनाथ राम ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल (यूनाइटेड) से की थी। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उन्हें राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। खेल, मद्य निषेध और स्वास्थ्य जैसे विभागों का दायित्व संभालते हुए उन्होंने प्रशासनिक अनुभव भी हासिल किया।

बाद के वर्षों में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और 2005 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। उस दौरान उन्हें राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। हालांकि 2009 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और 2014 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं, जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का साथ चुना। जेएमएम ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने भी पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए लातेहार सीट से जीत हासिल की।

उनकी इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इससे जेएमएम को उस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में मदद मिली। पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मजबूत संबंध और लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए अब उन्हें राज्यसभा के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजने का फैसला सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ अनुभवी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यदि उनके नाम की आधिकारिक घोषणा होती है, तो यह जेएमएम की आगामी राजनीतिक दिशा और गठबंधन की रणनीति को भी स्पष्ट करने वाला कदम माना जाएगा।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी राजनीतिक गतिविधियों के बीच बैद्यनाथ राम का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है और अब सभी की नजर पार्टी की औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई है।