बिहार की राजधानी पटना में जेपी गंगा पथ पर हाल ही में लगाई गई प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों को हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। अब इस इलाके में नई डिजाइन की दुकानें स्थापित की जाएंगी। पहले खरमास के बाद दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया में मार्च-अप्रैल तक का समय लग सकता है।
पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा दुकानों की नई डिजाइन को लेकर मंथन किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जयपुर और इंदौर मॉडल की तर्ज पर अब दुकानों की आधुनिक और आकर्षक डिजाइन तैयार की जाएगी। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेपी गंगा पथ क्षेत्र का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद मिले निर्देशों के आलोक में ही दुकानों की डिजाइन में बदलाव का निर्णय लिया गया है।
दरअसल, जेपी गंगा पथ का इलाका अब पटना वासियों के लिए सैर-सपाटे और घूमने-फिरने का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर दिन यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और इस वजह से वेंडरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की योजना इस पूरे क्षेत्र की बेतरतीब व्यवस्था को खत्म कर इसे एक सुव्यवस्थित वेंडिंग जोन के रूप में विकसित करने की थी। इसी क्रम में पिछले कई महीनों से जेपी गंगा पथ के किनारे प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों को इंस्टॉल किया जा रहा था।
बताया जा रहा है कि लगभग 300 दुकानों को इंस्टॉल भी कर लिया गया था। इन दुकानों पर बिहार की लोकसंस्कृति और पारंपरिक कलाओं की झलक भी उकेरी गई थी। खरमास के बाद इन्हें वेंडरों को आवंटित करने की योजना थी, लेकिन अचानक डिजाइन बदलने के फैसले से पूरी प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि पहले से लगी इन 300 दुकानों का क्या होगा। इस मुद्दे पर अधिकारियों के स्तर पर विमर्श जारी है। संभावना जताई जा रही है कि इन दुकानों का उपयोग पटना के अन्य विकसित या प्रस्तावित वेंडिंग जोन में किया जा सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।