पटना का नाम बदलकर फिर से 'पाटलिपुत्र' किया जाना चाहिए, उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में रखी मांग

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान बिहार से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया गया.

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 04, 2026, 7:05:00 PM

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान बिहार से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया गया. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता और सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने राजधानी पटना का नाम बदलकर दोबारा 'पाटलिपुत्र' किए जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, तब अपने गौरवशाली इतिहास को याद करना और उसे सम्मान देना भी जरूरी है.

उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा कि जब हम अपने पूर्वजों के योगदान को याद करते हैं, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है. यही प्रेरणा विकसित भारत की यात्रा को आगे बढ़ाती है. राष्ट्रपति के शब्द हमें उस दौर की याद दिलाते हैं, जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था.

उपेंद्र कुशवाहा ने मौर्य काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भारत की सीमाएं बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान तक फैली हुई थीं. उस दौर में बिहार का गौरव पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा था. उन्होंने कहा कि मौर्य साम्राज्य के चिन्ह आज भी हमारे सामने मौजूद हैं. हमारी जिम्मेदारी है कि इतिहास पर जमी धूल को साफ करें और उस गौरव को फिर से जीवंत बनाएं.

सदन में अपनी बात रखते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने शहरों के नाम बदलने का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कलकत्ता का नाम कोलकाता किया गया. उड़ीसा का नाम ओडिशा हुआ. बंबई का नाम मुंबई रखा गया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने शहरों के नाम बदले जा सकते हैं, तो पटना का नाम पाटलिपुत्र क्यों नहीं किया जा सकता.

भारत में किसी शहर का नाम बदलने के लिए पहले राज्य सरकार को विधानसभा में प्रस्ताव पास करना होता है. इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है. इस प्रक्रिया में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनापत्ति जरूरी होती है. साथ ही रेल मंत्रालय, डाक विभाग, इंटेलिजेंस ब्यूरो और सर्वे ऑफ इंडिया से भी सहमति ली जाती है. सभी विभागों की हरी झंडी के बाद ही नाम बदलने की अधिसूचना जारी होती है.