बिहार की राजनीति से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। क्या कड़वाहट की जगह अब फिर से पुरानी दोस्ती ले रही है? दरअसल, मौका था राजधानी पटना के निसरपुरा में 'सरस्वती बसंत-पटेल अतिथिशाला' के भव्य शिलान्यास कार्यक्रम का। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जैसे ही इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी, सबकी नजरें वहां मौजूद एक खास शख्स पर टिक गईं। वो शख्स कोई और नहीं, बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद रहे आरसीपी सिंह थे।
हैरान करने वाली बात ये रही कि जिस आरसीपी सिंह का कद कभी जेडीयू में नंबर दो का हुआ करता था, वो आज मंच पर नहीं, बल्कि नीचे दर्शकों के बीच एक सामान्य कुर्सी पर बैठे नजर आए। लेकिन चर्चा उनकी जगह की नहीं, बल्कि उनकी 'मौजूदगी' की हो रही है। जानकारों का कहना है कि बिना किसी सियासी तालमेल के आरसीपी सिंह का मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शिरकत करना महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। पिछले कुछ हफ्तों से आरसीपी सिंह के सुर पूरी तरह बदले हुए हैं। जो आरसीपी कभी नीतीश सरकार पर हमलावर थे, वे अब मुख्यमंत्री की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। हाल ही में उनका वो बयान भी खूब वायरल हुआ जिसमें उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था— "नीतीश कुमार और मैं अलग कब थे?" अब सवाल उठता है कि क्या यह 'घर वापसी' की तैयारी है?
आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार का रिश्ता करीब ढाई दशक यानी 25 साल पुराना है। मूल रूप से नालंदा के मुस्तफापुर के रहने वाले आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार की ही तरह 'कुर्मी' समुदाय से आते हैं। 1984 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे सिंह की मुलाकात नीतीश कुमार से 1996 में हुई थी।
नीतीश ने उनकी कार्यशैली को इतना पसंद किया कि उन्हें रेल मंत्रालय में अपना विशेष सचिव और फिर बिहार का मुख्यमंत्री बनने पर प्रधान सचिव बनाया। 2010 में वीआरएस लेकर आरसीपी सिंह राजनीति में आए, राज्यसभा पहुंचे और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक का सफर तय किया। देखा जाए तो नीतीश कुमार की की जेडीयू में रखते हुए आरसीपी सिंह को बहुत कुछ मिला।
आरसीपी सिंह जब तक जेडीयू में रहे, उनका रुतबा बना रहा। हालांकि नीतीश कुमार के साथ रिश्तों में खटास आई तो उन्होंने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया। जेडीयू छोड़ने के बाद वे बीजेपी में शामिल हुए, लेकिन वहां उन्हें वह अहमियत और भरोसा नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। बीजेपी में भाव न मिलता देख आरसीपी सिंह ने बिहार में अपनी पार्टी बना ली। लेकिन शायद जमीनी हकीकत का अंदाजा लगते ही उन्होंने प्रशांत किशोर की जन सुराज में अपनी पार्टी का विलय कर दिया। लेकिन अब कयास लगाया जा रहा है कि फिर से आरसीपी सिंह जदयू में आएंगे। जिस तरह से तस्वीर निकाल कर सामने आई है उसके बाद से लोग फाइनल मान रहे हैं कि अब RCP सिंह जदयू में आएंगे