निशांत को CM बनाने की आवाज उठाने वाले JDU के नेता हो जाए सावधान ! तुरंत लिया जा रहा एक्शन

नीतीश के बाद अगला CM कौन? इसको लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। सम्राट या निशांत, JDU के अंदर भी आवाज उठने लगी है, बिहार का CM कैसा हो निशांत कुमार जैसा हो।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Mar 19, 2026, 4:08:00 PM

Kanhaiya Bhelari  Editor-in-Chief Swaraj Post की कलम से

नीतीश के बाद अगला CM कौन? इसको लेकर तमाम तरह की चर्चा चल रही है। सम्राट या निशांत, JDU के अंदर भी आवाज उठने लगी है, बिहार का CM कैसा हो निशांत कुमार जैसा हो। 

बिहार का सीएम कैसा हो? निशांत कुमार जैसा हो!

ये नारा आजकल जनता दल यूनाइटेड के अंदरूनी गलियारों में धीरे-धीरे गूंज रहा है। लेकिन ये आवाज जितनी तेजी से उठती है, उतनी ही तेजी से दबा भी दी जाती है। क्योंकि पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश है—जो बोलेगा, उसका राजनीतिक भविष्य डांवाडोल हो सकता है। और जो चुप रहेगा, वही सुरक्षित रहेगा।

देखिए, राजनीति में ख्वाहिशें सबकी होती हैं। लेकिन हर ख्वाहिश मुकम्मल नहीं होती। कई बार दिल की बातें दिल में ही रह जाती हैं, और जब वो बाहर नहीं आ पातीं, तो आंसुओं में बदल जाती हैं। आज जेडीयू के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं की स्थिति कुछ ऐसी ही नजर आ रही है।

अब सवाल उठता है—क्या वाकई निशांत कुमार को आगे लाने की कोई रणनीति बन रही है?

सूत्रों की मानें तो करीब 20 से 25 विधायकों की एक  बैठक हुई, जिसमें निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की बात चली। लेकिन सवाल ये है कि क्या इतनी संख्या में विधायक किसी को सीएम बना सकते हैं? जवाब साफ है—नहीं।

बिहार की सत्ता का समीकरण सिर्फ जेडीयू तक सीमित नहीं है। इसमें बीजेपी की भूमिका भी उतनी ही अहम है। और अगर बीजेपी की बात करें, तो वहां भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक अजीब सा सन्नाटा है। कोई खुलकर कुछ नहीं बोल रहा।

अब बात करते हैं मुख्यमंत्री Nitish Kumar की।

नीतीश कुमार लगातार इशारों में एक बात जरूर कह रहे हैं—“हमरा बाद…” लेकिन उनका ये ‘हमरा बाद’ किसके लिए है? क्या वो किसी खास चेहरे की ओर इशारा कर रहे हैं, या फिर ये सिर्फ एक राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति है?

नीतीश कुमार लगातार सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने को लेकर बोल रहे हैं, जमुई में भी बोले, CM के सामने एंकर भी बोल रही है सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री आ रहे हैं, देखिए ये तो फाइनल ही है बिहार का अगला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी  होंगे। क्योंकि बिहार की राजनीतिक गतिविधियां इसी तरफ इशारा कर रही है। 

कन्हैया भेलारी कहते हैं—100% कुछ भी तय नहीं होता। भूकंप कभी पूछकर नहीं आता, और पल भर में सब कुछ बदल सकता है। अब ज़रा राजनीति की बात करें… नीतीश कुमार खुद कई बार खुलकर कहते रहे हैं। सवाल ये है—उपेंद्र जी, आखिर कब तक इंतज़ार? भाई, त्रिवेणी संघ बना था—यादव, कुर्मी और कोइरी समाज के लिए। यादव से मुख्यमंत्री बन गए, फिर कुर्मी से भी बन गए…
अब अगला नंबर किसका?

तेजस्वी से भी कहा गया—“हमारे बाद तुम ही हो।” प्रशांत किशोर को भी संकेत दिया गया—“अब आगे आपको संभालना है।” आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया… लेकिन सच्चाई क्या है? परदा के पीछे कितने चेहरे हैं, और हर कोई खुद को अगला मुख्यमंत्री मान रहा है।

इधर डिप्टी सीएम Samrat Choudhary का नाम भी लगातार चर्चा में है। कई मौकों पर ऐसा लगा कि बीजेपी उन्हें आगे बढ़ाना चाहती है। खुद नीतीश कुमार ने भी कुछ मंचों से उनका नाम लेकर संकेत दिए हैं। लगातार समृद्धि यात्रा में नीतीश कुमार सम्राट चौधरी को आगे कर रहे हैं और उनका नाम ले रहे हैं। लेकिन राजनीति में संकेत और सच के बीच काफी फासला होता है।

अब ज़रा जेडीयू के अंदर की बात समझिए।

पार्टी के भीतर एक ‘कोर टीम’ की चर्चा है—चार लोगों की एक ऐसी टीम, जो हर गतिविधि पर नजर रखती है। इसमें एक मंत्री, एक एमएलसी, एक करीबी रिश्तेदार और एक बेहद भरोसेमंद अधिकारी शामिल बताए जाते हैं। ये टीम तय करती है कि कौन क्या बोलेगा, कौन कितना आगे जाएगा और किसे कब रोकना है। यानी साफ है—पूरा सिस्टम कंट्रोल में है। और इस कंट्रोल के बाहर जाने की इजाजत किसी को नहीं है।

अब सवाल ये भी है कि अगर सब कुछ पहले से तय है, तो फिर ये अंदरखाने की हलचल क्यों?

दरअसल, राजनीति में ‘आने वाले’ की तैयारी हमेशा पहले से शुरू हो जाती है। लेकिन ‘जाने वाले’ का असर इतना गहरा होता है कि उसे हटाना आसान नहीं होता।

बिहार की जनता के दिल में आज भी नीतीश कुमार की एक अलग जगह है। चाहे विरोध हो या समर्थन, लेकिन उनकी पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि कोई भी नया चेहरा लाने से पहले कई बार सोचना पड़ता है।

और आखिर में एक बात—

राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। जो आज तय लग रहा है, वो कल बदल भी सकता है। जैसे भूकंप आने से पहले कोई नहीं जानता कि कब और कहां झटका लगेगा, वैसे ही राजनीति में भी फैसले अचानक बदल जाते हैं।

साफ तौर पर अब कहां जा रहा है कि निशांत को लेकर जो नारा लगाया जा रहा है उसे बंद कर दिया जाए। बीजेपी ऑफिस में भी फिलहाल सन्नाटा पसरा हुआ है। निशांत को लेकर नारा लगाने वाले को शांत कर दिया जा रहा है। आज के लिए इतना ही।