“निशांत की एंट्री तय? CM के बेटे को राजनीति में लाने के लिए JDU की भूख हड़ताल”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकर्ताओं के एक ग्रुप ने निशांत कुमार के एक्टिव राजनीति में आने की मांग को लेकर 12 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Dec 28, 2025, 1:53:00 PM

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने इस मांग को लेकर राजधानी पटना के गर्दनीबाग में 12 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की है। रविवार सुबह से ही कार्यकर्ता एकत्र होने लगे और नारेबाजी करते हुए अपनी मांग दोहराते रहे।

राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर जनता दल (यू) से जुड़े मुकुंद सेना के कार्यकर्ताओं ने रविवार को 12 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी। मुकुंद सेना के सदस्यों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना “अभिभावक” बताते हुए उनसे अपील की कि वे अपने पुत्र निशांत कुमार को पार्टी में सक्रिय भूमिका सौंपें

भूख हड़ताल पर बैठे जदयू कार्यकर्ताओं का कहना है कि निशांत कुमार पढ़े-लिखे, सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले और साफ छवि के व्यक्ति हैं। उनका मानना है कि अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो पार्टी को एक मजबूत, स्थिर और भविष्य के लिए तैयार नेतृत्व मिल सकता है। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि पार्टी के जमीनी स्तर पर लंबे समय से यह भावना है कि अब नेतृत्व की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को दी जानी चाहिए और निशांत कुमार इसके लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हैं।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह भूख हड़ताल फिलहाल 12 घंटे की है, लेकिन यदि इस दौरान उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगला चरण 24 घंटे की भूख हड़ताल का होगा, जिसे पटना के जेपी गोलंबर पर जेपी प्रतिमा के नीचे आयोजित किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘अभिभावक’ बताते हुए उनसे भावनात्मक अपील की। उनका कहना है कि पार्टी और बिहार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निशांत कुमार को राजनीति में आने की अनुमति दी जानी चाहिए।

 कार्यकर्ताओं का दावा है कि यदि निशांत कुमार नेतृत्व संभालते हैं तो जदयू के कार्यकर्ता पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े रहेंगे और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।

हालांकि, अब तक निशांत कुमार या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है।