पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब सियासी और सामाजिक तूल पकड़ लिया है। इस दर्दनाक घटना के बाद जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर जहानाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की और उनकी पीड़ा सुनी।
पीड़िता की मां ने रोते-बिलखते हुए प्रशांत किशोर को बताया कि पांच जनवरी को उनकी आखिरी बार बेटी से बात हुई थी। छह जनवरी को बेटी से संपर्क नहीं हो पाया, उसी दिन हॉस्टल से फोन आया कि उनकी बेटी बेहोश हो गई है। हॉस्टल की वार्डन नीतू ने कहा कि “जल्दी आइए, आपकी बेटी को होश नहीं आ रहा है, ठंड लग गई है।”
परिजन जब पटना पहुंचे तो बेटी प्रभात मेमोरियल अस्पताल में भर्ती थी। मां ने बताया कि उस वक्त बेटी बोलने की हालत में नहीं थी और अस्पताल में कोई पुलिस मौजूद नहीं थी। डॉक्टर सतीश ने उन्हें बताया कि बच्ची के साथ कुछ गलत हुआ है और वह काफी डरी हुई है। मां ने कहा कि उन्होंने डॉक्टर को भगवान मानकर भरोसा किया।
पीड़िता की मां ने बताया कि वे पांच दिनों तक अस्पताल में रहे। इस दौरान हॉस्टल प्रबंधन ने कहा कि जितना पैसा लगेगा, वे देंगे। जब बेटी को होश आया और मां से मुलाकात हुई, तो वह फूट-फूटकर रोने लगी और मां का हाथ पकड़ लिया। मां ने हिम्मत करके पूछा कि क्या उसके साथ कुछ गलत हुआ है, लेकिन तभी डॉक्टर ने हाथ पकड़कर बाहर निकाल दिया और कहा कि कुछ भी पूछना ठीक नहीं है, इससे बच्ची पर असर पड़ेगा।
पूरी बात सुनने के बाद प्रशांत किशोर ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वे इस मामले को गंभीरता से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि बड़े अधिकारियों से समय लिया जाएगा और जो भी संभव होगा, न्याय दिलाने की कोशिश की जाएगी।
इस दौरान जब प्रशांत किशोर वहां से जाने लगे, तो मौजूद लोगों ने बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी—“बिहार सरकार मुर्दाबाद” और “नीतीश कुमार होश में आओ” के नारे गूंज उठे।
यह मामला अब सिर्फ एक परिवार के दर्द तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार में छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन गया है।