बिहार की जेलों में मोबाइल की 'होम डिलीवरी': अनंत सिंह वाली जेल में 15 हजार में बैरक तक पहुंच रहा मोबाइल, सम्राट की सख्ती के बाद भी नहीं थम रहा गैरकानूनी खेल

बिहार की सबसे 'सुरक्षित' जेल... बेऊर जेल! वो जगह जहाँ अनंत सिंह और रीतलाल यादव जैसे बाहुबलियों का ठिकाना है। सरकार कहती है यहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Dec 18, 2025, 4:32:00 PM

बिहार की सबसे 'सुरक्षित' जेल... बेऊर जेल! वो जगह जहाँ अनंत सिंह और रीतलाल यादव जैसे बाहुबलियों का ठिकाना है। सरकार कहती है यहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। गृहमंत्री दहाड़ते हैं कि 10 हजार कैमरे लगेंगे और माफिया राज खत्म होगा।

लेकिन... क्या ये सच है? या ये सिर्फ एक सरकारी 'स्क्रिप्ट' है? क्योंकि जब हमारी टीम 'ऑपरेशन जेल' पर निकली, तो जो हकीकत सामने आई, उसने सिस्टम की धज्जियां उड़ा कर रख दीं!

जेल के बाहर लगे ठेले सिर्फ लिट्टी-चोखा या चाय नहीं बेच रहे। ये असल में 'डील' के अड्डे हैं। यहाँ खुलेआम बोली लगती है। ₹400 दीजिए और आपका सामान सीधे सलाखों के पार! जेल प्रशासन की नाक के नीचे ये संगठित नेटवर्क ऐसे चल रहा है जैसे कोई ई-कॉमर्स डिलीवरी कंपनी हो।

अब जो आप सुनेंगे, वो आपके पैरों तले जमीन खिसका देगा। खुफिया कैमरे पर एक एजेंट बड़े गर्व से कहता है—

"मोबाइल आपके आदमी तक पहुँच जाएगा। बड़े साहब खुद अपने हाथों से लेकर जाएंगे। बस ₹15,000 दीजिए, कैदी की डिटेल दीजिए... कीपैड वाला फोन और सिम सीधे बैरक में डिलीवर होगा!"

सोचिए! जिस मोबाइल को ले जाना संगीन जुर्म है, उसे खुद 'साहब' अपने हाथों से पहुँचाने की डील कर रहे हैं। पेमेंट का तरीका भी हाई-टेक है— 'UPI' करिए और जेल के अंदर नेटवर्क एक्टिवेट! क्या जेल प्रशासन इन माफियाओं के आगे सरेंडर कर चुका है?

ये सिर्फ बेऊर की कहानी नहीं है। राज्य की आधा दर्जन जेलों की कहानी है। हर जगह सुरक्षा के दावे खोखले निकले। जब बाहर बैठा एक मामूली एजेंट ये गारंटी दे सकता है कि 'फोन पर बात कभी भी करा देंगे', तो सवाल उस 60% क्राइम पर उठता है जो जेलों से ऑपरेट होता है।अगर जेल के अंदर मोबाइल है, तो बाहर मर्डर भी होगा और रंगदारी भी माँगी जाएगी। तो क्या ये 10 हजार कैमरे सिर्फ दीवारों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं? या फिर सिस्टम के 'साहब' खुद इस भ्रष्टाचार के हिस्सेदार हैं?

सरकार बदलती है, चेहरे बदलते हैं, लेकिन जेलों का ये 'सिंडिकेट' नहीं बदलता। 'ऑपरेशन जेल' ने साफ़ कर दिया है कि बिहार की जेलों में कानून का नहीं, बल्कि 'कैश और कनेक्शन' का राज चलता है। अब जवाब सरकार को देना है— क्या वाकई माफिया राज खत्म होगा, या ये सौदा यूँ ही जारी रहेगा?

बता दें कि बिहार में NDA की नई सरकार बनते ही गृहमंत्री सम्राट चौधरी एक्शन में हैं। सुशासन और कानून का राज स्थापित करने के लिए सम्राट ने जेल में बंद माफियाओं पर एक्शन शुरू किया है।

सम्राट चौधरी ने जेल और वहां बंद माफिया और उनकी मॉनिटरिंग को लेकर कई चैलेंज किए हैं। पहले गृहमंत्री का चैलेंज जानिए..

'माफिया किसी भी स्तर का हो, उसे हर हालत में बेऊर जेल के अंदर ही रहना होगा। माफियाओं के लिए जेल से बाहर कोई जगह नहीं होगी। 60% क्राइम जेल से होता है।

मॉनिटरिंग के लिए 10 हजार कैमरे जेल के अंदर लगवाने का काम चल रहा है। अब तो किसी भी चीज को जाने नहीं दूंगा। माफिया राज नहीं चलेगा।'