मसौढ़ी में 10वीं की छात्रा की मौत पर सियासत गरम, तेजस्वी यादव का हमला, बोले- बिहार की बेटियों के काल बनी यह सरकार

बिहार की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। Tejashwi Yadav ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 20, 2026, 11:40:00 AM

बिहार की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। Tejashwi Yadav ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि Nitish Kumar और भाजपा की सरकार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और मौजूदा व्यवस्था “काल” बन चुकी है।

तेजस्वी यादव ने पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र की 10वीं की छात्रा कोमल कुमारी की मौत का जिक्र करते हुए इसे सरकारी कुप्रबंधन का परिणाम बताया। उनके मुताबिक, कुछ मिनट की देरी के कारण छात्रा को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे आहत होकर उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। उन्होंने इसे केवल एक छात्रा की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता करार दिया।

जानकारी के अनुसार, मसौढ़ी की रहने वाली छात्रा अपनी पहली बोर्ड परीक्षा देने जा रही थी। रास्ते में जाम और अव्यवस्था के कारण वह परीक्षा केंद्र कुछ मिनट देर से पहुंची। नियमों का हवाला देते हुए केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने उसे प्रवेश देने से इनकार कर दिया। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रा ने काफी अनुरोध किया, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। इस घटना से वह गहरे सदमे में चली गई और बाद में आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

तेजस्वी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह केवल स्कूल का दरवाजा बंद होना नहीं था, बल्कि एक बेटी के सपनों और भविष्य का दरवाजा बंद कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में हर परीक्षा के दौरान जाम, कुप्रबंधन और बदइंतजामी की स्थिति रहती है। उनकी बातों में भावनात्मक अपील भी दिखी—उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियां परीक्षा केंद्रों के बाहर रो रही हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की है कि छात्रा के परिजनों को तुरंत मुआवजा दिया जाए और परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की देरी से पहुंचने वाले छात्रों को मानवीय आधार पर प्रवेश देने का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि एक-दो मिनट की देरी किसी की जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकती।

इस घटना के बाद बिहार में परीक्षा नियमों में लचीलापन, ट्रैफिक प्रबंधन और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, जबकि प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार नियमों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगी, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।