पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। पार्टी के कई सांसदों और नेताओं के अलग रुख अपनाने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में लोकसभा के 19 सांसदों के एक समूह ने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करते हुए स्पीकर कार्यालय से संपर्क किया है, जिसे टीएमसी के भीतर बढ़ती गुटबाजी का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस समूह ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर के समक्ष अपनी मांग से जुड़े दस्तावेज जमा किए थे। इस सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, युसुफ पठान, रचना बनर्जी, दीपक अधिकारी, माला रॉय, पार्थ भौमिक सहित कुल 19 सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि शुरुआती चर्चाओं में अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी सामने आया था, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वे ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ ही बने रहेंगे।
बागी खेमे की प्रमुख नेता काकोली घोष दस्तीदार ने पुष्टि की है कि सांसदों के इस समूह ने लोकसभा में अलग सीटिंग व्यवस्था की आधिकारिक मांग रखी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल संसदीय व्यवस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक विभाजन की ओर भी इशारा करता है। चुनावी प्रदर्शन में गिरावट के बाद पुराने नेताओं और शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने की चर्चा लंबे समय से चल रही है।
उधर, राज्यसभा में भी टीएमसी को लगातार झटके लग रहे हैं। पश्चिम Bengal का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद प्रकाश चिक बराइक ने उच्च सदन की सदस्यता छोड़ दी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर यह तीसरा बड़ा इस्तीफा माना जा रहा है। इससे पहले 10 जून को सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता से त्यागपत्र दिया था, जबकि 8 जून को सुखेंदु शेखर रे ने न केवल राज्यसभा से बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था।
राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद प्रकाश चिक बराइक ने कहा कि उन्होंने जनता की भावना को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं ने कांग्रेस के साथ विलय की अटकलों को भी खारिज किया है। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा विवाद पूरी तरह पार्टी का आंतरिक मामला है और इसका किसी अन्य दल से विलय की संभावनाओं से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके गुट को अब 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि शुरुआत में 58 विधायक उनके साथ थे। उनके अनुसार, समर्थक विधायक जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंप सकते हैं।
दूसरी ओर, बागी सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल भाजपा नेताओं के साथ कथित बैठकों की खबरों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। हालांकि अब तक किसी भी प्रकार के औपचारिक गठबंधन या विलय की पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में किसी तरह का दल-बदल या राजनीतिक पुनर्गठन होता है, तो उसे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत लागू दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों का पालन करना होगा। इसके लिए संबंधित दल के कम से कम दो-तिहाई निर्वाचित सदस्यों का समर्थन आवश्यक माना जाता है।
टीएमसी में लगातार बढ़ते असंतोष, सांसदों की अलग पहचान की मांग और राज्यसभा से हो रहे इस्तीफों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है, इस पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर बनी हुई है।