क्या जीवित व्यक्तियों को भारत रत्न मिल सकता है? जानिए इसके लिए क्या नियम और शर्तें हैं?

भारत रत्न देश का वह सर्वोच्च शिखर है, जहां तक पहुंचने का सपना असाधारण सेवा करने वाला हर व्यक्ति देखता है. हाल ही में जेडीयू नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Jan 10, 2026, 2:48:00 PM

भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसे पाने का सपना हर वह व्यक्ति देखता है जिसने राष्ट्र के लिए असाधारण योगदान दिया हो। हाल ही में जेडीयू नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की है। उन्होंने नीतीश कुमार को ‘समाजवादी आंदोलन का अनमोल रत्न’ बताते हुए कहा कि उनका योगदान इस सम्मान के योग्य है। इस मांग के बाद आम जनता के मन में एक सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है—क्या भारत रत्न केवल मरणोपरांत दिया जाता है या जीवित व्यक्ति भी इसे प्राप्त कर सकता है?

इतिहास बताता है कि भारत रत्न की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। उस समय नियमों में मरणोपरांत सम्मान देने का कोई प्रावधान नहीं था। यानी यह पुरस्कार केवल जीवित रहते हुए असाधारण सेवा के लिए ही दिया जाता था। बाद में 1966 में नियमों में संशोधन किया गया और मरणोपरांत भारत रत्न देने की व्यवस्था जोड़ी गई। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्हें मरणोपरांत यह सम्मान मिला।

अब तक कुल 53 हस्तियों को भारत रत्न से नवाजा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश को यह सम्मान उनके जीवनकाल में ही मिला। हाल के वर्षों में देखें तो 2024 में लालकृष्ण आडवाणी को जीवित रहते हुए भारत रत्न दिया गया। उनसे पहले सचिन तेंदुलकर, अटल बिहारी वाजपेयी, लता मंगेशकर और अमर्त्य सेन जैसी महान हस्तियों को भी यह सम्मान जीवनकाल में मिला है।

नीतीश कुमार के समर्थकों का कहना है कि बिहार के विकास, सुशासन और सामाजिक सुधारों में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। 10 बार मुख्यमंत्री बनने और राज्य की बुनियादी संरचना में बदलाव का श्रेय उन्हें दिया जाता है। हालांकि, भारत रत्न देने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रधानमंत्री की सिफारिश पर निर्भर करती है, जिसे राष्ट्रपति को भेजा जाता है। इसके लिए कोई औपचारिक नामांकन प्रक्रिया नहीं होती।

एक वर्ष में सामान्यतः अधिकतम तीन लोगों को ही भारत रत्न दिया जाता है। यह सम्मान किसी तरह की धनराशि नहीं देता, बल्कि राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित ‘सनद’ और पीपल के पत्ते के आकार का एक पदक प्रदान किया जाता है।