'क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री हैं?', सुप्रीम कोर्ट सख्त, सम्राट सरकार-ECI से मांगा जवाब, कुशवाहा के बेटे को नोटिस

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jun 15, 2026, 4:04:00 PM

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। दीपक प्रकाश को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य (विधायक/एमएलसी) चुने बिना दोबारा बिहार का पंचायती राज मंत्री बनाए जाने को चुनौती दी गई है। उनके केस में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने पूछा 'क्या वो अभी मंत्री पद पर हैं?

सोशल एक्टिविस्ट राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और भारत निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा- क्या वो अभी भी मंत्री पद पर हैं? याचिकाकर्ता ने इसके बाद बताया कि हां, अभी भी हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने फिलहाल किसी तरह की अंतरिम टिप्पणी या आदेश नहीं दिया है, लेकिन राज्य सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। 

याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश राज्य के किसी भी सदन के निर्वाचित सदस्य नहीं हैं, इसलिए वे मंत्री पद पर बने नहीं रह सकते। दीपक प्रकाश वर्तमान में न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। ऐसे में उन्हें मंत्री पद पर बनाए रखना संविधान की भावना और प्रावधानों के खिलाफ है। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी गैर-विधायक व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है और इस अवधि में उसे विधायिका का सदस्य बनना अनिवार्य होता है।

याचिकाकर्ता के वकील सुदीप चंद्रा और सान्या कौशल ने दलील दी कि दीपक प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्री नियुक्त किया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को सरकार गिर गई और 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने पर उन्हें फिर से मंत्री बना दिया गया। याचिका के अनुसार, पहली नियुक्ति के आधार पर छह महीने की संवैधानिक सीमा 20 मई 2026 को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में बार-बार मंत्री नियुक्त करना संविधान के प्रावधानों का दुरुपयोग है।

याचिका में एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य (2001) मामले का हवाला देते हुए कहा गया है कि अनुच्छेद 164(4) की छह महीने की सीमा को इस्तीफे या कैबिनेट फेरबदल के जरिए दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता। इसे इस्तीफे कैबिनेट फेरबदल, मुख्यमंत्री बदलने या नई सरकार के गठन के बहाने दोबारा रीसेट (शून्य) नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अगर ऐसे ही बार-बार बिना चुने गए लोगों को मंत्री बनाया गया, तो यह संसदीय लोकतंत्र, जवाबदेही और कानून के शासन के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

बता दें कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने दोबारा मंत्री बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई हुई। जहां कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिहार में पंचायती राज मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।  लेकिन अब तक विधानसभा या किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।