झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हालिया पुनर्गठन के बाद पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। संगठन में बदलाव के तुरंत बाद एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पुत्र प्रशांत किशोर ने अपने सचिव पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रदेश प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर यह जानकारी दी।
अपने त्यागपत्र में प्रशांत किशोर ने कहा कि बदलती प्राथमिकताओं के चलते वह इस जिम्मेदारी को आगे नहीं निभा पाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय सोच-समझकर लिया गया है और पार्टी नेतृत्व द्वारा दिए गए अवसर के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।
इसी बीच, संगठनात्मक फैसलों को लेकर वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण किशोर ने भी खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रदेश प्रभारी को लिखे पत्र में पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि निर्णयों में समानता नहीं बरती जा रही है। खास तौर पर उन्होंने बड़कागांव के नेता और पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव को तीन वर्षों के लिए निष्कासित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के आधार पर सवाल खड़े किए।
किशोर ने अपने पत्र में एक अन्य मामले का भी जिक्र किया, जिसमें रमा खलको को चुनाव प्रबंधन समिति में शामिल किए जाने पर उन्होंने असहमति जताई। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी या नेतृत्व की आलोचना की, उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जो संगठन के भीतर असंतुलन का संकेत है।
इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नई कमेटी के गठन के बावजूद पार्टी के भीतर मतभेद कम नहीं हुए हैं। उलटे, हालिया फैसलों ने असंतोष को और उभार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में पार्टी के भीतर खींचतान और तेज हो सकती है।