रोहिणी आचार्य के पोस्ट पर जेडीयू का समर्थन: संजय झा बोले- राजद के लोगों को घुटन हो रही

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा महिलाओं के अधिकारों, विशेषकर मायके में बेटियों के स्थान को लेकर किए गए सोशल मीडिया पोस्ट ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Dec 12, 2025, 6:04:00 PM

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा महिलाओं के अधिकारों, विशेषकर मायके में बेटियों के स्थान को लेकर किए गए सोशल मीडिया पोस्ट ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इस मुद्दे पर रोहिणी का समर्थन किया है, जबकि साथ ही राजद पर तंज भी कसा है।

जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि रोहिणी ने महिलाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है, जिसपर सरकार निश्चित रूप से ध्यान देगी। उन्होंने नीतीश सरकार की महिलाओं के हित में की गई पहलों पर प्रकाश डाला और दावा किया कि नीतीश कुमार ने सभी, खासकर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की है।

झा ने कहा, "हमने कभी भी किसी परिवार के बारे में निजी टिप्पणियाँ नहीं की हैं, लेकिन जब बेटी के अधिकार की बात आती है, तो बिहार में नीतीश जी का काम अतुलनीय है।" उन्होंने राजद में "घुटन" महसूस करने वाले लोगों की बात कहकर परोक्ष रूप से राजद के आंतरिक मामलों पर भी निशाना साधा।

सारण से लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं लालू की बेटी रोहिणी आचार्या ने गुरुवार को महिलाओं खासकर मायके में बेटियों के अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, " लड़कियों को 10000 रुपये देना या साइकिलें बांटना, भले ही नेक इरादे से किया गया हो, लेकिन ये भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण में बाधा डालने वाले व्यवस्थागत मुद्दों को हल करने के मद्देनजर अपर्याप्त है। सरकार और समाज का यह प्रथम दायित्व होना चाहिए कि वह बेटियों के समान अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए, खासकर सामाजिक और पारिवारिक उदासीनता के मद्देनजर ।

रोहिणी ने कहा कि बिहार में गहरी जड़ें जमा चुकी पितृसत्तात्मक मानसिकता सामाजिक और राजनीतिक, दोनों क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता पैदा करती है। प्रत्येक बेटी को इस आश्वासन के साथ बड़े होने का अधिकार है कि उसका मायका एक ऐसा सुरक्षित स्थान है, जहाँ वह बिना किसी डर, अपराधबोध, शर्म या किसी को कोई स्पष्टीकरण दिए बिना लौट सकती है। इस उपाय को लागू करना केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि अनगिनत महिलाओं को भविष्य में होने वाले शोषण और उत्पीड़न से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

जेडीयू द्वारा राजद नेता के बयान का समर्थन करना बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यह दिखाता है कि महिला अधिकार और सुरक्षा जैसे मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन पर वे अप्रत्याशित रूप से एकमत हो सकते हैं, भले ही उनके बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हो। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समर्थन बिहार की गठबंधन राजनीति को किस तरह प्रभावित करता है।