बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में लगातार सियासी गतिविधि जारी है। बीते दिनों राजधानी पटना में जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जहां कई अहम फैसले लिए गए। इस बीच नीतीश कुमार की ओर से एक बड़ा फैसला लिया गया है। इस फैसले से बीजेपी ही नहीं विपक्षी भी सावधान हैं। दरअसल नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में लड़ने का ऐलान किया है।
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बिहार की सियासत में भी जबरदस्त हलचल शुरू हो गई है। जेडीयू ने पंजाब विधानसभा चुनाव में बड़ी तैयारी शुरू कर दी है और पंजाब में 45 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी 117 में से 45 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। पंजाब जेडीयू अध्यक्ष मालवेंद्र सिंह बेनीपाल ने यह बड़ा दावा किया है।
मालवेंद्र सिंह बेनीपाल ने कहा है कि जेडीयू पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। चुनावी अभियान का नेतृत्व नीतीश कुमार के नाम पर केंद्रित रहेगा। बेनीपाल ने कहा-पंजाब और बिहार का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह के 350वें प्रकाश पर्व के आयोजन का भी जिक्र किया।
पंजाब जेडीयू अध्यक्ष मालवेंद्र सिंह बेनीपाल ने दावा किया कि पंजाब के सिखों में नीतीश कुमार के प्रति श्रद्धा और विश्वास है। संगठन को मजबूत कर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी तेज की जा रही है। ऐसे में पंजाब की राजनीति में जेडीयू की सक्रिय एंट्री से सियासी हलचल बढ़ गई है।
बता दें कि पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाला है। सभी पार्टियां तैयारी में जुट गई है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए 'करो या मरो' वाली लड़ाई है। क्योंकि यह इकलौता राज्य है, जहां उसकी सरकार है। कांग्रेस के लिए, यह 2022 में खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की लड़ाई है। जबकि BJP के लिए, यह अपनी झोली में एक नया राज्य जोड़ने की कोशिश है। पंजाब एकमात्र ऐसा राज्य है जहां BJP कभी भी अपने दम पर सत्ता में नहीं रही है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी लड़ाई के लिए तैयार और अनुभवी BJP पंजाब में कोई चौंकाने वाला नतीजा दे सकती है? फ़िलहाल तो जेडीयू की सक्रिय एंट्री से पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को एक दिलचस्प राजनीतिक लड़ाई बना दिया है।