इफ्तार से दूरी, बदली सियासत, लालू यादव के राजनीतिक अस्त्र को छोड़ अलग राह पर निकले तेजस्वी

न दही-चूड़ा भोज, न होली मिलन समारोह… और अब इफ्तार भी नहीं। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष Tejashwi Yadav ने अपने पिता Lalu Prasad Yadav की पारंपरिक राजनीतिक शैली से अलग रास्ता चुन लिया है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Mar 21, 2026, 12:45:00 PM

न दही-चूड़ा भोज, न होली मिलन समारोह… और अब इफ्तार भी नहीं। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष Tejashwi Yadav ने अपने पिता Lalu Prasad Yadav की पारंपरिक राजनीतिक शैली से अलग रास्ता चुन लिया है।

रमजान के दौरान पटना में मौजूद रहने के बावजूद तेजस्वी यादव ने न तो दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया और न ही फुलवारीशरीफ स्थित इमारत-ए-शरिया पहुंचे। यह वही परंपरा थी जिसे लालू प्रसाद सालों से निभाते आए थे, जहां इफ्तार के जरिए सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक संदेश दोनों दिए जाते थे।

तेजस्वी के इस कदम ने राजद के अंदर हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के कई नेताओं के बीच चर्चा है कि आखिर इस बदलाव का मतलब क्या है। MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण राजद की राजनीति की रीढ़ माना जाता है, ऐसे में इफ्तार जैसे आयोजन से दूरी बनाना नेताओं को चौंका रहा है।

आखिरी जुमे के दिन राजद के अल्पसंख्यक नेता इकबाल अहमद ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की विचारधारा से यह अलगाव समझ से परे है। 10 सर्कुलर रोड या 1 पोलो रोड पर इफ्तार क्यों नहीं हुआ? क्या अब सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए ही राजनीति चलेगी?

वहीं दूसरी तरफ, विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को देखते हुए पार्टी रणनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहती है। बागी विधायक फैसल रहमान पर कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। तेजस्वी और उनकी टीम अनुशासनात्मक कदम उठाना चाहती थी, लेकिन एक भी विधायक के टूटने का जोखिम नहीं लेना चाहती।

कुल मिलाकर, तेजस्वी यादव की नई राजनीतिक दिशा बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही है।