EWS सर्टिफिकेट पर बड़ा फैसला, बिहार सरकार की नई गाइडलाइन से खत्म होगा भ्रम और धांधली

बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने EWS सर्टिफिकेट को लेकर जारी भ्रम, देरी और धांधली को जड़ से खत्म करने के नई पहल की है

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Mar 27, 2026, 10:07:00 AM

बिहार में EWS सर्टिफिकेट को लेकर लंबे समय से चल रही भ्रम, देरी और धांधली की शिकायतों को खत्म करने के लिए अब बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक नई और सरल गाइडलाइन जारी की है, जिसमें ‘28 सवाल-जवाब’ के जरिए पूरे नियम को बेहद आसान भाषा में समझाया गया है। इस पहल का मकसद है कि आम लोगों को अब ब्लॉक ऑफिस के चक्कर न काटने पड़ें और अधिकारी भी नियमों की अलग-अलग व्याख्या न कर सकें।

EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का सर्टिफिकेट सामान्य वर्ग के उन लोगों के लिए होता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस सर्टिफिकेट के जरिए उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण का लाभ मिलता है। लेकिन अब तक इसकी प्रक्रिया में कई तरह की परेशानियां सामने आती थीं, जिसे दूर करने के लिए सरकार ने यह नई गाइडलाइन लागू की है।

नई व्यवस्था के अनुसार, EWS सर्टिफिकेट के लिए परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। इस आय में सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि खेती, व्यापार और अन्य सभी स्रोतों से होने वाली कमाई को भी शामिल किया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि अब पात्रता तय करने के लिए केवल पति-पत्नी और उनके आश्रित बच्चों की संयुक्त आय को ही आधार बनाया जाएगा। माता-पिता की आय को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे पहले काफी भ्रम बना रहता था।

संपत्ति को लेकर भी सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। यदि किसी के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि है, या शहरी क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट से बड़ा फ्लैट है, तो वह EWS के दायरे से बाहर हो जाएगा। इसके अलावा, शहरों में 100 वर्ग गज और ग्रामीण इलाकों में 200 वर्ग गज से बड़े प्लॉट के मालिक भी इस श्रेणी के पात्र नहीं होंगे।

सरकार ने सभी जिलाधिकारियों, आयुक्तों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस गाइडलाइन को सख्ती से लागू किया जाए। अब डीएम से लेकर अंचल अधिकारी तक सभी को एक ही फ्रेमवर्क पर काम करना होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को राहत मिलेगी।

साथ ही, सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर EWS सर्टिफिकेट बनवाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बिना पूरी जांच के कोई भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। नई गाइडलाइन से उम्मीद है कि अब प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त होगी।