दीपक प्रकाश बिना MLA-MLC बने 6 महीने से मंत्री कैसे..बिहार सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के छह महीने से अधिक समय तक विधायक या विधान परिषद सदस्य बने बिना मंत्री पद पर बने रहने पर सवाल उठाया है। अब कोर्ट इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद खतरे में है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।  शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना होगा। अब कोर्ट इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के छह महीने से अधिक समय तक विधायक या विधान परिषद सदस्य बने बिना मंत्री पद पर बने रहने पर सवाल उठाया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। दीपक प्रकाश न विधायक हैं और न ही एमएलसी, इसके बावजूद वह मंत्री पद पर बने हुए हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना होगा। यह मामला अब अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। बिहार सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला पहले से 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने या पहले सुनने का फैसला अदालत के विवेक पर छोड़ दिया गया। सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा, राज्य सरकार उसका पालन करेगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और व्हिसलब्लोअर राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर बिहार सरकार को नोटिस जारी किया था।

CJI ने कहा कि ये पूरी तरह कानून का सवाल है। राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधायक/विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से ज्यादा वक्त तक मंत्री कैसे बना रह सकता है। हम उनसे जवाब मांगेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा है कि छह महीने बाद भी विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बनने के बावजूद वह मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं।मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

बता दें कि यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एवं व्हिसलब्लोअर राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। याचिका में दीपक प्रकाश की दोबारा मंत्री नियुक्ति को संविधान के अनुच्छेद 164(4) के विरुद्ध बताया गया है। संविधान के अनुसार, कोई गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है और इस अवधि के भीतर उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए संविधान में छह महीने की छूट दी गई है, लेकिन ये छूट केवल एक बार के लिए होती है.  दीपक प्रकाश इस समयसीमा को पार कर चुके हैं।